फोरेंसिक लैब बंद, प्रभारी निदेशक सहित कर्मी लापता

फोरेंसिक लैब बंद, प्रभारी निदेशक सहित कर्मी लापता

लाँक डाउन की उड़ी धज्जियां

भागलपुर (राजेश)। क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला भागलपुर, सी टी एस परिसर नाथनगर में संचालित है। यह गृह विभाग बिहार सरकार के अधीन काम करता है। इस कार्यालय में अपराध में घटित घटनाओं में होने वाले भौतिक साक्ष्यों को न्यायालय के आदेश पर पुलिस द्वारा प्रयोगशाला में जांच करने के लिए भेजा जाता है। विधि विज्ञान प्रयोगशाला द्वारा जांच कर इसकी जांच रिपोर्ट न्यायालय को समर्पित की जाती है। जो न्यायालय के न्यायिक प्रक्रिया में काफी सहायक सिद्ध होता है। ऐसे महत्वपूर्ण संस्थान के प्रभारी निदेशक, लॉक डाउन की घोषणा के बाद भागलपुर से पटना चले गये। इसके बाद कार्यरत सभी कर्मचारी लाँक डाउन की स्थिति में कार्यालय बंद कर फरार हैं। यहां मात्र होमगार्ड के कुछ सिपाही हैं जो गार्ड की ड्यूटी करते हैं। जबकि राज्य सरकार का आदेश है कि आधे कर्मी व पदाधिकारी को अल्टरनेट डे कार्यालय जाकर सरकारी कामों को करना है। लेकिन इस तरह से लॉक डाउन में नियम की धज्जियां उराकर मनमाने तरीके से कार्यालय को बंद कर देना एक बड़ी लापरवाही है।

कार्य- घटनाओं का स्थल निरीक्षण कर प्रर्दशों का संग्रह विधि विज्ञान प्रयोगशाला द्वारा पुलिस के अनुरोध पर घटना स्थल पर प्रयोगशाला की टीम जाकर करती है। जिसमें भिसरा, खून, सिमेन, बिस्फोटक, बंदूक आदि की जांच की जाती है।

वर्तमान में यदि कोई घटना घटित होती है तो घटना स्थल निरीक्षण के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला के एक भी कर्मी/पदाधिकारी नहीं मिलेंगे।

प्रभारी निदेशक कहते हैं – प्रभारी निदेशक ने दूरभाष पर स्पष्ट कहा कि वे लाँक डाउन घोषित होने के बाद भागलपुर से पटना आ गये हैं।
कर्मचारियों को यातायात के साधन उपलब्ध नहीं होने के कारण से कार्यालय नहीं आ पा रहे हैं। यही वजह है कि कार्यालय बंद है।
लाँक डाउन समाप्त होने पर सभी लोग कार्य पर वापस आ जायेंगे।
साथ ही प्रभारी निदेशक ने सफाई को भी एक कारण बताया।

सवाल – प्रधानमंत्री ने जब पूरे देश के लिए लाँक डाउन की घोषणा करते हुए जो जहां है जैसे भी है वहीं रूक जाने का आदेश दिये और इसे तोड़ने पर सजा की भी घोषणा की तो प्रभारी निदेशक भागलपुर से पटना कैसे पहुंच गए ?
लाँक डाउन का उलंघन वरीय पदाधिकारी होते हुए कैसे की ? कार्यालय खुला रखने की व्यवस्था क्यों नहीं की ? अभी बीच-बीच में उपद्रव जैसे हालात भी बन जाते हैं ऐसे में कहीं बड़ी घटना हो गयी तो फिर बिहार सरकार की फोरेंसिक लैब टीम वहां नहीं पहुंच पायेगी !

प्रभाव- पुलिस जांच फिर पुराने ढर्रे पर बिना जांच के पूरी की जायेगी ?

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