अंग क्षेत्र कीं उपेक्षा कब तक ?

Ang Chetra ki charcha

धारावाहिक   2 : गौतम सुमन

 

भागलपुर : बिहार की सांस्कृतिक विरासत क्या केवल बिहार नालंदा है ?अंग क्षेत्र के विक्रमशीला से लेकर इसके आस-पास अंगजनपदों की दुर्दशा सरकार को कदापि स्थिर नहीं रहने देगी ।सृजन से मनेरगा तक अपने सारे लूट का कचरा फेंकते समय सरकार को अंग क्षेत्र दिखता है और जब इसके हिस्से का हक देने का वक्त आता है तो उन्हें केवल नालंदा दिखता है ।क्या केवल नालंदा ही बिहार है,जहाँ के वे मुख्यमंत्री हैं ? आखिर कब अंग क्षेत्र आश्वासनों और वादे-घोषणाओं के पिटारे से बाहर आएगा ?

उक्त बातें अंग उत्थानान्दोलन समिति,बिहार-झारखंड सह अंग मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौतम सुमन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कही ।उन्होंने अंग क्षेत्र के बगैर बिहार को बहियार बताते हुए कहा कि अंग की समृद्धि के बिना बिहार की समृद्धि कतई संभव नहीं है । उन्होंने बिहार सरकार को स्मरण कराते हुए कहा है कि 1912 में वृहत्तर बंगाल से जब बिहार अलग हुआ था तो इसे चार प्रमंडलों में बाँटा गया था,जिसमें एक छोटानागपुर झारखंड में तब्दील हो गया शेष अंग-मगध और तिरहुत इन तीन प्रमंडलों का प्रांत बिहार आज भी अक्षुण्ण है । उन्होंने अफसोस प्रकट करते हुए कहा कि इस इतिहास व भूगोल को बदलने की साजिश हो रही है ।बिहार सरकार  बिहार की सांस्कृतिक विरासत केवल नालंदा को ही  साबित करने पर तुली हुई है ।

नालंदा विश्वविद्यालय को विक्रमशीला विश्वविद्यालय की इकाई बताते श्री सुमन ने कहा है कि विक्रमशीला महासमुद्र था तो नालंदा इसकी सहायक नदियों में एक थी । उन्होंने कहा कि अंग क्षेत्र की भाषा-साहित्य,सभ्यता- संस्कृति और विरासत के साथ सरकारी व प्रशासनिक उदासीनता एवं उपेक्षा के बदौलत अंग क्षेत्र का हृदय स्थल भागलपुर एक टापू के रूप में तब्दील हो चुका है । सड़कें ऐसी है जिसमें सरकार के बेईमान मंसूबे और विकृत चेहरे साफ नजर आते हैं । पटना से नालंदा की ओर जाने वाली सड़कें फोरलेन और मुंगेर-बांका,भागलपुर आदि की सड़कें सामान्य ढंग से चलने लायक भी नहीं;इस बात को प्रमाणित करता है ।सैलानी विक्रमशीला की ओर रूख कर सके इसे इस लायक भी नहीं छोड़ा गया है । उन्होंने आस-पास सटे आज के दो प्रमंडल मुंगेर और भागलपुर को अंग क्षेत्र की जुड़वां बहन बताते हुए कहा कि इसके समुचित विकास व प्रगति के मार्ग पर सरकार ने रोक का बेरियर लगा दिया है ।यहाँ के लोगों को उनकी नीज भाषा से गूंगा बनने और रोज पलटने वाले जुगार गाड़ी पर माँ-बेटी,बहन-बहुओं को सवार होने वाला राहगीर बनने पर एक साजिश के तहत मजबूर व विवश किया गया है ।उन्होंने यहाँ औधोगिक विकास करने-कराने की बजाय लोगों को बेरोजगारी व भूखमरी के आगोश में भेजने का बिहार सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि यहाँ कई बंद पड़े कल-कारखानों को चालू नहीं किये जाने से लोग हर रोज भूख और बेकारी से तंग आकर यहाँ से पलायन कर रहे हैं ।उन्होंने कहा कि एक तरफ मुख्यमंत्री नीतिश कुमार खुद को विकास पुरुष साबित करने हेतु एड़ी-चोटी एक किये हुए हैं वहीं दूसरी तरफ बीस सालों में 100 मीटर पुल नहीं बनना,रोज आए दिन हत्या,लूट,बलात्कार,अतिक्रमण,चोरी-डकैती,छिनतई,भ्रष्टाचार,रिश्वतखोरी,हर सरकारी विभागों में व्यापक हेराफेरी-अनियमितता व मनमानी आदि की घटना चरम पर है । उन्होंने भागलपुर में विकास की राशि सृजन घोटाले के रूप में हजारों करोड़ लूट के विसर्जन पर बिहार सरकार की चूप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर कब तक अंग क्षेत्र को विकास के नाम पर आश्वासन-वादे और घोषणाएं मिलती रहेगी ?

उन्होंने कहा कि अंग क्षेत्र में विकास और समुचित सम्मान व अधिकार के नाम पर लोग चुप्पी तोड़कर एकजूट होते हुए बड़े जंग की तैयारी कर रहे हैं और इतिहास गवाह है कि इस तरह अंग क्षेत्र ने जब-जब अंगराई लिया है सत्ता परिवर्तन निश्चित हुआ है ।इसलिए जरूरी है अंग की इस पुकार को सरकार समय रहते सोचें और समझें ।

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