अंग क्षेत्र कीं उपेक्षा कब तक ?

Ang Chetra ki charcha
  • धारावाहिक  3  : Uddesye Ravi Bgp

 

इसमें यह भी शामिल किया जाए कि भागलपुर क़ी सांस्कृतिक विरासत को नष्ट करने की एक साज़िश चल रही है. सरकारी तौर पर चलने वाले इस षड्यंत्र में पुरातात्विक प्रमाणों से छेड़छाड़ इस वक़्त चरम पर है. हाल में मंदार पर्वत पर रोपवे बनाने के क्रम में मंदार के सबसे बड़े शिलालेख को जो क्षति की गई वह अपूरणीय है. यह प्रक्रम ठीक वैसा ही था जैसे संस्कृति और इतिहास की छाती को चीर कर सड़ने के लिए छोड़ दिया गया है. इसके नष्ट होने की पुर्व सूचना मैंने डीएम, बाँका को दी थी. बावज़ूद इसके किसी प्रकार की कार्रवाई करने के, पर्वत के ऊपर पुराकाल में निर्मित नाग बासुकी की पेटी के चिह्न पर भी ड्रिल कर रोपवे का एक टावर बना दिया गया. इस मुद्दे पर जब डीएम से बात हुई तो उन्होंने कहा कि मुझे जो करना है, मैं वो कर रहा हूँ.ठीक इसी प्रकार, सुल्तानगंज के बाबा अजगैबी नाथ के परिसर के किसी प्राचीन शिलालेख पर भी एक कंस्ट्रक्शन खड़ा कर दिए जाने की जानकारी मिली है. वहां हो रहे निर्माण पर शिवशंकर सिंह पारिजात ने आवाज़ उठाई थी मगर जिला प्रशासन ने एक न सूनी. सूचनार्थ कि, हाल में ही इस आशय की खबर कई अखबारों में छपीं. कई जगह इस आलोख मैं बैठकें हुई. और, प्रशासन इससे तिलमिला गई. मंदार के इस शिलालेख के बारे में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संस्थापक एलेक्जेंडर कनिंघम ने जेएसईबी के एक अंक में चर्चा की है. जॉन फेथफुल फ्लीट, फ्रांसिस बुकनन, मोंट्गोमेरी मार्टिन जैसे विद्वानों ने इसकी चर्चा कीं.

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