राज्‍यपाल सत्‍यपाल मलिक ने 69 वें गणतंत्र दिवस फहराया तिरंगा,  मुख्यमंत्री भी थे मौजूद

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पटना। बिहार के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने सामाजिक कुरीतियों नशा, बाल विवाह और दहेज प्रथा के प्रति जागरूक होने पर बल देते हुये आज कहा कि इसके बिना विकास कार्यों का शत-प्रतिशत लाभ समाज को नहीं मिल पाएगा।

श्री मलिक ने यहां ऐतिहासिक गांधी मैदान में 69वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर झंडोत्तोलन के बाद राज्यवासियों को संबोधित करते हुये कहा कि समाज को विकास कायोर्ं का शत-प्रतिशत लाभ तबतक नहीं मिलता जबतक कि समाज व्याप्त कुरीतियों के प्रति जागरूक न हो। इसलिए, समाज सुधार के कार्यक्रमों को भी पूरी तत्परता के साथ लागू किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समाज की अधिकांश कुरीतियों से सबसे अधिक महिलायें प्रभावित होती हैं। इसके मद्देनजर राज्य सरकार ने 02 अक्टूबर 2017 से बाल विवाह एवं दहेज प्रथा के उन्मूलन के लिए सशक्त अभियान शुरू किया है।

राज्यपाल ने कहा कि बाल विवाह और दहेज प्रथा कि खिलाफ सशक्त कानून होने के बावजूद समाज में ये दोनों कुरीतियां विद्यमान हैं इसलिए इनके विरुद्ध सबके सहयोग से सामाजिक अभियान चलाना आवश्यक था। उन्होंने कहा कि बाल विवाह एवं दहेज प्रथा के खात्मे के लिए चलाये गये अभियान के माध्यम से शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर, लैंगिक असमानता, कुपोषण एवं बौनापन, लड़कियों में असुरक्षा की भावना और अशिक्षा जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि इस वर्ष 21 जनवरी को राज्यवासियों ने बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ 14 हजार किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनाकर इस अभियान के समर्थन में अपने संकल्प को प्रकट किया है।

श्री मलिक ने कहा कि सरकार ने इससे पूर्व राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू की तथा उसके बाद पूर्ण नशाबंदी का संकल्प लिया है। सरकार के इस कदम से राज्य में इसके प्रति खासकर महिलाओं, युवाओं एवं बालक-बालिकाओं में काफी उत्साह है। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग से शराबबंदी एक सामाजिक अभियान का रूप ले चुकी है। पूर्ण शराबबंदी से समाज अधिक सशक्त, स्वस्थ एवं संयमी हुआ है, जिसका अतुल्य प्रभाव बिहार की प्रगति में परिलक्षित हो रहा है। शराबबंदी के कारण परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार तथा पारिवारिक हिंसा, घरेलू कलह एवं सामाजिक अपराध के मामलों में कमी आई है।

राज्यपाल ने कहा कि सरकार ने सुशासन एवं न्याय के साथ विकास के सिद्धांत पर राज्य के विकास के लिए सार्थक प्रयास किये हैं। सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हो रही है। विकास और कल्याण के पथ पर सभी क्षेत्रों और वगोर्ं को साथ लेकर चलने के लिए सरकार संकल्पित है। राज्य में विकास की रणनीति समावेशी, न्यायोचित और सतत् होने के साथ ही आर्थक प्रगति पर आधारित है। बिहार को देश के विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने के लिए सुशासन के कार्यक्रम लागू किये गये हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून का राज कायम रखना सरकार की सवोर्च्च प्राथमिकता है। संगठित अपराध पर अंकुश लगाया गया है और यही व्यवस्था आगे भी जारी है। पुलिस तंत्र के सुदृढीकरण के लिए कई कदम उठाये गये हैं ताकि वे अपने जिम्मेदारियों का निर्वहन कुशलतापूर्वक कर सकें। उन्होंने कहा कि यह सरकार के संकल्प का ही परिणाम हैं कि राज्य में सौहार्द्र एवं सांप्रदायिक सछ्वाव का वातावरण है।

श्री मलिक ने कहा कि भ्रष्टाचार पर’जीरो टॉलरेंस’की नीति पर सरकार की मुहिम जारी है। भ्रष्ट लोकसेवकों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। प्रशासनिक एवं वित्तीय संरचनाओं को मजबूत एवं पारदर्शी बनाने के साथ ही लोगों को कानूनी अधिकार देकर सशक्त बनाने की नीति पर लगातार काम किया जा रहा है। प्रशासन के निचले स्तर पर भ्रष्टाचार की समस्या के निदान के लिए’बिहार लोक सेवाओं का अधिकान कानून’के तहत अभी तक 17 करोड़ 76 लाख आवेदनों का निष्पादन किया जा चुका है।  उन्होंने कहा कि बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम 2०15 को लागू कर लोगों को उनकी शिकायत पर सुनवाई के साथ ही निर्धारित समयसीमा में इसके निवारण का भी कानूनी अधिकार दिया गया है। पिछले डेढ़ वर्ष में ही करीब दो लाख 41 हजार से अधिक शिकायतों का निपटारा किया गया है।

आज राज्यपाल सत्य पाल मलिक ने गणतंत्र दिवस-2018 के सुअवसर पर स्थानीय गाँधी मैदान में पूर्वाह्न 09.00 बजे राष्ट्रीय झंडोत्तोलन किया। इसके पूर्व‚ राज्यपाल शहीद-ए-कारगिल स्मृति स्थल‚ पटना गये और अमर शहीदों को अपनी श्रद्धांजलि निवेदित की। राज्यपाल के गाँधी मैदान पहुँचने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनका स्वागत किया राष्ट्रीय सलामी दी गई तथा बाद में राज्यपाल ने खुली जीप में परेड का निरीक्षण किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय धुन बजाई गई। राज्यपाल ने ‘मार्च पास्ट की भी सलामी ली तथा उनके द्वारा गणतंत्र दिवस-2018 के अवसर पर ‘शौर्य पुरस्कारसे अलंकृत विजेताओं को पुरस्कार भी प्रदान किये गये। राज्यपाल ने विभिन्न सरकारी विभागों/संगठनों द्वारा निकाली गयी झाँकियों को भी अवलोकित किया।

राज्यपाल श्री मलिक ने ऐतिहासिक गाँधी मैदान में ‘गणतंत्र दिवसके अवसर पर राज्य की जनता को संबोधित करते हुए उन्हें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ दी। इस अवसर पर बोलते हुए राज्यपाल ने कहा कि राज्य सरकार ने सुशासन एवं न्याय के साथ विकास के लिए सार्थक प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि बिहार में ‘कानून का राजस्थापित रखना राज्य सरकार की सर्वोंच्च प्राथमिकता है। राज्यपाल ने कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के विरूद्ध ‘जीरो टॉलरेंसकी नीति पर कायम है। उन्होंने ‘बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम‚‘सुशासन के कार्यक्रम‚‘विकसित बिहार के सात निश्चय‚‘लोक संवाद कार्यक्रम‚‘बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना‚‘मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना‚‘कुशल युवा कार्यक्रम‚‘बिहार स्टार्ट-अप नीति‚‘बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन अधिनियम-2016 आदि का उल्लेख करते हुए इनके सफल कार्यान्वयन की बात कही।

समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विकासात्मक कार्यों का लाभ समाज को तबतक शत प्रतिशत नहीं मिलता है‚ जबतक कि समाज व्याप्त कुरीतियों के प्रति जागरूक नहीं हो। इसलिए समाज-सुधार के कार्यक्रमों को भी पूरी तत्परता के साथ लागू किया जाना आवश्यक है। समाज में व्याप्त अधिकांश कुरीतियों से सबसे अधिक महिलायें प्रभावित होती हैं। इस पृष्ठभूमि में सरकार ने पूर्ण शराबबंदी लागू की तथा उसके बाद पूर्ण नशाबंदी का संकल्प लिया है। संपूर्ण बिहार में इसके प्रति जनसामान्य‚ विशेषकर महिलाओं‚ युवाओं एवं बालक-बालिकाओं में काफी उत्साह है। सभी के सहयोग से शराबबंदी एक सामाजिक अभियान का रूप ले चुकी है। पूर्ण शराबबंदी से समाज अधिक सशक्त‚ स्वस्थ एवं संयमी हुआ है‚जिसका अतुल्य प्रभाव बिहार की प्रगति में परिलक्षित हो रहा है। शराबबंदी के कारण परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार तथा पारिवारिक हिंसा‚ घरेलू कलह एवं सामाजिक अपराध में कमी आई है। श्री मलिक ने कहा कि राज्य सरकार ने सामाजिक सुधार की इस कड़ी को आगे बढ़ाते हुए गत वर्ष 2 अक्टूबर से बाल-विवाह एवं दहेज-प्रथा के उन्मूलन हेतु राज्यव्यापी अभियान प्रारंभ किया है। बाल-विवाह और दहेज-प्रथा के विरूद्ध वर्तमान में कानूनों के प्रवृŸk होने के बाद भी दोनों कुरीतियाँ समाज में व्याप्त हैं और इसलिए इनके विरूद्ध सभी के सहयोग से सामाजिक अभियान चलाना आवश्यक था। बाल-विवाह एवं दहेज प्रथा उन्मूलन अभियान के माध्यम से शिशु मृत्यु दर‚ मातृ मृत्यु दर‚ लैंगिक असमानता‚ कुपोषण एवं बौनापन‚ लड़कियों में असुरक्षा की भावना‚ अशिक्षा आदि समस्याओं को कम करने में सहायक होगा। 21 जनवरी को बाल विवाह तथा दहेज प्रथा के विरूद्ध बिहारवासियों ने लगभग      14 हजार किलोमीटर लंबी मानव-श्रृंखला बनाकर इस अभियान के समर्थन में अपने संकल्प का प्रकटीकरण किया है।

राज्यपाल ने कहा कि बिहार गौरवशाली इतिहास और संपन्न विरासत से परिपूर्ण है। विकास के साथ-साथ कला‚ संस्कृति एवं पर्यटन क्षेत्र के संवर्द्धन पर राज्य सरकार का विशेष ध्यान है। उन्होंने कहा कि बीते वर्ष 23 से 25 दिसम्बर तक श्री गुरू गोबिन्द सिंह जी महाराज के 350वें प्रकाश पर्व का ‘शुकराना समारोहसफलतापूर्वक आयोजित किया गया। लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने इस आयोजन में भाग लिया। बापू के ‘चम्पारण सत्याग्रहकी ऐतिहासिक स्मृति के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वर्ष 201718 को ‘चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी समारोहके रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर महात्मा गाँधी एवं चम्पारण-सत्याग्रह से जुड़े स्थलों पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये गये हैं। इस अवधि में बापू के आदर्श एवं संदेशों को घर-घर तक पहुँचाया गया है तथा बच्चों को महात्मा गाँधी के विचारों एवं आदर्षों से अवगत कराया जा रहा है। राज्यपाल ने बताया कि चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह का समापन आगामी ‘बिहार दिवसके अवसर पर किया जायेगा। 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्रामके महानायक बाबू वीर कुँवर सिंह के 160वें विजयोत्सव के अवसर पर 23 से 25 अप्रैल-2018 तक तीन दिवसीय विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा।

श्री मलिक ने कहा कि बिहार राज्य में सभी जाति‚ धर्म और सम्प्रदाय के बीच अनुकरणीय समन्वय है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि समाज में सद्भाव एवं भाईचारा का वातावरण कायम रहे। ‘गणतंत्र दिवसके शुभ अवसर पर राज्यपाल ने बिहारवासियों को आह्वान करते हुए कहा कि बिहार को आर्थिक रूप से सबल तथा सामाजिक एवं नैतिक रूप से सशक्त बनाने में सभी अपनी सक्रिय भागीदारी निभायें। उन्होंने गणतंत्र दिवस के अवसर पर समारोह में उपस्थित सभी लोगों एवं समस्त बिहार वासियों को अपनी शुभकामनाएँ दी।

गणतंत्र दिवस समारोह-2018 में प्रदर्शित की जाने वाली झाँकियों में बिहार शिक्षा परियोजना परिषद् पटना(शिक्षा विभाग बिहार पटना) को प्रथम पुरस्कार‚ उपेन्द्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान पटना (उद्योग विभाग बिहार) को द्वितीय पुरस्कार तथा जीविका परियोजना बिहार पटना को तृतीय पुरस्कार प्रदान किये जाने की घोषणा की गई। साथ ही बेस्ट पैरेड के लिए प्रोफेशनल ग्रुप में सी॰आर॰पी॰एफ एवं नन-प्रोफेशनल में एन॰सी॰सी॰ ए॰आई॰आर॰‚ बेस्ट टर्न आउट प्रोफेशनल ग्रुप में एस॰एस॰बी॰ तथा नन-प्रोफेशनल के लिए एन॰सी॰सी॰ आर्मी गर्ल्स‚ बेस्ट प्लाटून कमाण्डर प्रोफेशनल ग्रुप में एस॰टी॰एफ एवं नन प्रोफेशनल में एन॰सी॰सी॰ आर्मी ब्यायज को पुरस्कार प्रदान किये जाने की घोषणा की गई। 

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