सत्यपाल मलिक राज्यपाल बिहार का अभिभाषण

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भाइयों‚ बहनों एवं प्यारे बच्चों‚

राष्ट्र के 69वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर आप सबको एवं समस्त बिहारवासियों को मैं हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देता हूँ।

आज ही के दिन 1950 में हमारा देश एक गौरवशाली संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित हुआ और हमने संसदीय व्यवस्था पर आधारित शासन की नींव रखी। संविधान के माध्यम से राष्ट्र के सभी नागरिकों के लिए सामाजिक‚ आर्थिक और राजनैतिक न्याय‚ विचार‚ अभिव्यक्ति‚ विश्वास‚ धर्म और उपासना की स्वतंत्रता‚ प्रतिष्ठा और अवसर की समता तथा गरिमापूर्ण जीवन उपलब्ध कराने के सिद्धान्त हमारे पथ−प्रदर्शक हैं। इन्हीं के सहारे देश के सर्वांगीण विकास की परिकल्पनायें पूरी हो रही हैं।

राज्य सरकार ने सुशासन एवं न्याय के साथ विकास के सिद्धान्त पर राज्य के विकास के लिए सार्थक प्रयास किये हैं। सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हो रही है। विकास और कल्याण के पथ पर सभी क्षेत्रों और वर्गों को साथ लेकर चलने के लिए राज्य सरकार संकल्पित है। राज्य में विकास की रणनीति समावेशी‚ न्यायोचित और सतत् होने के साथ-साथ आर्थिक प्रगति पर आधारित है। बिहार को देश के विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने के निमित्त सुशासन के कार्यक्रम सम्पूर्ण राज्य में लागू किये गये हैं।

बिहार में कानून का राज स्थापित रखना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। संगठित अपराध पर अंकुश लगाया गया है और यही व्यवस्था आगे भी जारी है। बिना किसी भेद-भाव के कानूनी प्रावधानों का अनुसरण कराते हुए अपराध-नियंत्रण की ठोस व्यवस्था लागू है। पुलिस तंत्र के सुदृढ़ीकरण हेतु अनेक कदम उठाये गये हैं ताकि वे अपने दायित्वों का निर्वहन कुशलतापूर्वक कर सकं। यह सरकार के संकल्प का ही परिणाम है कि राज्य में सामाजिक सौहार्द एवं साम्प्रदायिक सद्भाव का वातावरण है।

भ्रष्टाचार के विरूद्ध ‘जीरो टॉलरेन्स’ की नीति पर राज्य सरकार की मुहिम जारी है। भ्रष्ट लोक सेवकों के विरूद्ध कार्रवाई निरंतर की जा रही है। प्रशासनिक एवं  वित्तीय संरचनाओं को सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के साथ-साथ राज्य के नागरिकों को कानूनी अधिकार देकर सशक्त बनाने की नीति पर लगातार काम किया जा रहा है। प्रशासन के निचले स्तरों पर भ्रष्टाचार की समस्या के निदान के लिए ‘बिहार लोक सेवाओं का अधिकार कानून’के अंतर्गत अद्यतन 17 करोड़ 76 लाख आवेदनों का निष्पादन कर नागरिकों को विभिन्न लोक सेवाएँ एक नियत समय-सीमा के अंतर्गत उपलब्ध कराई गई हैं।

बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम‚ 2015 को लागू कर लोगों को उनके परिवाद पर सुनवाई के साथ-साथ नियत समय-सीमा में इसके निवारण का भी कानूनी अधिकार दिया गया है। इस अधिनियम के क्रियान्वयन को सफलता मिली है और नागरिकों का विश्वास बढ़ा है। डेढ़ वर्ष की अवधि में ही लगभग 2 लाख 41 हजार से अधिक आवेदनों का निष्पादन कर लोगों की शिकायतों का निवारण किया गया है।

मानव संसाधन के क्षमता-संवर्द्धन के लिए शिक्षा पर शुरू से ही ध्यान केन्द्रित किया गया है। नये प्राथमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय खोलने‚ नामांकन में वृद्धि लाने‚ कक्षाओं की संख्या बढ़ाने‚ शिक्षकों की उपलब्धता एवं उपस्थिति सुनिश्चित करने‚ प्राथमिक विद्यालयों को माध्यमिक विद्यालयों में उत्क्रमित करने‚ वंचित वर्गों को स्कूल में दाखिला कराने‚ लड़के-लड़कियों के बीच शिक्षा के अंतर को दूर करने एवं हर पंचायत में उच्चतर माध्यमिक विद्यालय स्थापित करने के लिए अनेक उपाय किये गये हैं। पोषाक‚ साईकिल एवं छात्रवृत्ति योजनाएँ छात्र-छात्राओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। अब सरकार शिक्षा की गुणवŸkk में सुधार के लिए कार्य कर रही है।

बिहारवासियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार किया है। प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र‚ अनुमंडल एवं जिला अस्पताल एक क्रियाशील स्वास्थ्य केन्द्र के रूप में कार्यरत है। अब द्वितीय चरण के सुधार के तहत स्वास्थ्य प्रक्षेत्र में विशिष्ट चिकित्सा हेतु आधारभूत संरचना का विकास एवं कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता पर काम किया जा रहा है‚ ताकि लोगों को राज्य में ही आधुनिक चिकित्सा उपलब्ध हो सके। आई॰जी॰आई॰एम॰एस॰ में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा प्रारंभ हो गई है तथा पी॰एम॰सी॰एच॰ में भी इसकी स्थापना की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। आई॰जी॰आई॰एम॰एस॰ में राज्य कैंसर संस्थान की स्थापना की जा रही है तथा लीवर प्रत्यारोपण की सुविधा भी शीघ्र प्रारंभ होगी। विकसित बिहार के 7 निश्चय के तहत राज्य में 5 नये चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना की जाएगी।

बिहार की लगभग 89 प्रतिशत जनसंख्या गाँवों में निवास करती है और जनसंख्या का लगभग 76 प्रतिशत अपनी आजीविका के लिए कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों पर आश्रित है। कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के समग्र विकास हेतु राज्य सरकार ने 2008 में पहला एवं 2012 में दूसरा कृषि रोड मैप लागू किया। दोनों कृषि रोड मैप की उपलब्धियों से प्रेरित होकर राज्य सरकार ने 2017 से 2022 तक के लिए तीसरा कृषि रोड मैप बनाया‚ जिसका शुभारम्भ माननीय राष्ट्रपति द्वारा 9 नवम्बर‚ 2017 को किया गया।

‘तीसरे कृषि रोड मैप’ में राज्य में जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए इनपुट अनुदान की व्यवस्था के साथ-साथ जैविक कॉरिडोर बनाने हेतु कार्रवाई की जा रही है। सब्जियों के व्यापार को व्यवस्थित करने तथा इस व्यापार में अपेक्षित पूँजी-निवेश के लिए राज्य के सहकारी प्रक्षेत्र के माध्यम से सब्जी संग्रहण-प्रसंस्करण एवं विपणन की त्रिस्तरीय व्यवस्था स्थापित की जा रही है। ड्रेनेज एवं सिवरेज का परिशोधित जल गंगा नदी में नहीं बहाकर इसका उपयोग खेती में सिंचाई के लिए करने के लिए विशिष्ट योजना बनायी जा रही है। इसके अतिरिक्त स्थानीय कृषि-यंत्र निर्माताओं को प्रोत्साहित करने‚ दुग्ध‚ मछली एवं अण्डा के उत्पादन में राज्य को आत्मनिर्भर बनाने‚ कृषि के लिए पृथक् फीडर की स्थापना कर बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा राज्य के हरित आवरण को 17 प्रतिशत तक पहुँचाने के लिए भी कार्रवाई की जा रही है। तीसरे कृषि रोड मैप के महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों की बदौलत किसानों की आय में वृद्धि होगी तथा प्रत्येक भारतवासी के थाल में बिहार के एक व्यंजन का सपना साकार होगा।

राज्य सरकार ने समावेशी विकास के लक्ष्यों के साथ कभी समझौता नहीं किया है। सरकार की रणनीति उन सभी नागरिकों को सशक्त बनाने की रही है‚ जो तुलनात्मक रूप से वंचित हैं और हाशिए पर हैं। राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जाति‚ अनुसूचित जनजाति‚ अतिपिछड़े एवं पिछड़े वर्गों‚ अल्पसंख्यकों‚ महिलाओं तथा बच्चों की शिक्षा‚ कौशल एवं आर्थिक विकास पर बल देते हुए अनेक कल्याणकारी कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं।

बिहार देश का बहु-आपदा प्रवण राज्य है। राज्य सरकार आपदा-पीडि़तों को राहत एवं बचाव की हरसंभव मदद पहुँचाने के लिए कटिबद्ध है। विभिन्न आपदाओं के लिए मानक संचालन-प्रक्रिया गठित कर‚ ‘आपदा रिस्पांस’में मानदंड स्थापित करने में बिहार देश का अग्रणी राज्य है। आपदाओं से निपटने के लिए ‘आपदा-जोखिम-न्यूनीकरण रोड’मैप तैयार करने वाला बिहार देश का पहला राज्य है। गत वर्ष बाढ़ के दौरान उल्लेखनीय बचाव एवं सहाय्य कार्य चलाकर बाढ़-पीडि़तों को राहत पहुँचायी गयी।

‘सुशासन के कार्यक्रम’ के तहत विकसित बिहार के 7 निश्चय के मिशन मोड में क्रियान्वयन‚ पर्यवेक्षण एवं परामर्श हेतु गठित ‘बिहार विकास मिशन’द्वारा संस्थागत व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए बेहतर कार्य प्रणाली को प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा ‘सात निश्चय’से संबंधित योजनाओं की वास्तविक स्थिति जानने हेतु क्षेत्र-भ्रमण एवं जिलों में समीक्षा बैठक की जा रही है।  श्वा    श्व  श्च

राज्य सरकार महिला-सशक्तीकरण के प्रति हमेशा संवेदनशील रही है और यह सरकार की नीतियों का अभिन्न अंग है। ‘जीविका’कार्यक्रम के तहत महिला स्वयं-सहायता-समूहों के गठन से महिलाओं में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता बढ़ी है। अब तक लगभग 8 लाख स्वयं- सहायता-समूहों का गठन किया गया है। राज्य में ‘महिला सषक्तीकरण नीति’ लागू है। सरकार ने अपने एक निष्चय ‘आरक्षित रोजगार, महिलाओं का अधिकार’ के तहत राज्य की सभी सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 35 प्रतिषत आरक्षण की व्यवस्था लागू    की है।

ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के समेकित विकास हेतु राज्य सरकार कृत संकल्पित है। गाँव एवं शहरों के आर्थिक एवं सामाजिक परिवेश में सकारात्मक बदलाव आया है। आवश्यक मूलभूत सुविधाएँ गाँव एवं शहरों तक पहुँची हैं, अब यह सुविधा सभी घरों को सुलभ करायी जा रही हैं। विकसित बिहार के निश्चय ‘हर घर नल का जल’ तथा ‘शौचालय निर्माण, घर का सम्मान’ के अंतर्गत योजनाओं का क्रियान्वयन हो रहा है तथा गाँव हो या शहर सभी घरों को नल का जल एवं शौचालय की सुविधा चरणबद्ध ढंग से उपलब्ध करायी जा रही है।

ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में सभी घरों को पाइप द्वारा पेयजल उपलब्ध कराने हेतु ’हर घर नल का जल’ के अंतर्गत अब तक ग्रामीण क्षेत्रों में 5 लाख 35 हजार से अधिक घरों को तथा शहरी क्षेत्रों के लगभग एक लाख घरों को इस सुविधा का लाभ दिया जा चुका है। ‘शौचालय निर्माण’ घर का सम्मान’ के निश्चय के तहत अब तक 23 लाख 8 हजार ग्रामीण तथा 1 लाख 58 हजार शहरी घरों को आच्छादित किया जा चुका है। अभी तक 4 अनुमंडल‚ 33 प्रखंड एवं 694 पंचायतों तथा 785 शहरी वार्डों को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जा   चुका है।

बिहार की नयी पीढ़ी को शिक्षा‚ कौशल विकास एवं रोजगार के अवसर प्रदान करते हुए सक्षम बनाने के लिए ‘आर्थिक हल‚ युवाओं को बल’निश्चय के तहत बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना‚ मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना एवं कुशल युवा कार्यक्रम संचालित हैं। बिहार स्टूडेन्ट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत अब तक लगभग 14 हजार युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए बैंक ऋण की स्वीकृति दी गई है। ‘मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना’के तहत अब तक 1 लाख 54 हजार से अधिक युवाओं को स्वयं सहायता भत्ता दी जा रही है। कुशल युवा कार्यक्रम के तहत 2 लाख से अधिक युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं जबकि 1 लाख से अधिक युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

राज्य सरकार ने राज्य में युवाओं की उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए ‘स्टार्ट-अप नीति’ लागू की है। इस नीति के तहत अब तक 856 स्टार्ट-अप्स को इन्क्यूबेटर के साथ संबद्ध किया गया है‚ जिसमें से चयनित 26 आवेदकों को 65 लाख रूपए विमुक्त किये गये हैं। इसके अतिरिक्त 300 सरकारी विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों में निःशुल्क वाई-फाई के माध्यम से इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है।

अवसर बढ़ें‚ आगे पढ़ें’निश्चय के तहत राज्य के आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान में युवाओं का योगदान‚ उच्च शिक्षा के विकास एवं कुशल कामगारों के आपूर्ति पक्ष को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रत्येक जिला में जी.एन.एम. संस्थान‚ पैरा-मेडिकल संस्थान‚ पॉलिटेकनिक‚ महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान एवं अभियंत्रण महाविद्यालय तथा प्रत्येक अनुमण्डल में ए.एन.एम. संस्थान एवं सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की कार्रवाई की जा रही है। इसके अतिरिक्त सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में नर्सिंग कॉलेज की स्थापना की जा रही है।

उच्च शिक्षा के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से पूर्णिया‚ पाटलिपुत्र एवं मुंगेर विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई है‚ जिसका संचालन शीघ्र प्रारंभ किया जायेगा। बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। राज्य में विश्वविद्यालय शिक्षकों की त्वरित नियुक्ति हेतु ‘बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग’का गठन अधिसूचित कर दिया गया है।

 

ग्रामीण आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने हेतु ‘घर तक पक्की गली-नालियाँ’ निश्चय के तहत अब तक ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 16 हजार वार्डों तथा शहरी क्षेत्रों में ढाई हजार वार्डों में कार्य प्रारंभ किया गया है। ग्रामीण टोला सम्पर्क निश्चय योजना के तहत अब तक 1 हजार 166 योजनाओं के क्रियान्वयन की स्वीकृति दी गई है।

बिजली की स्थिति में राज्य में उत्तरोत्तर सुधार हुआ है। राज्य में अधिकतम विद्युत-आपूर्ति 4 हजार 5 सौ 35 मेगावाट पहुँच गयी है। उत्पादन‚ संचरण‚ उपसंचरण एवं वितरण प्रणाली के सुधार हेतु अनेक योजनाओं पर काम चल रहा है। राज्य के सभी 39 हजार 73 गाँवों को विद्युत संपर्कता दी गई है। अब सभी टोलों को अप्रील‚ 2018 तक विद्युत सम्पर्कता प्रदान कर दी जायेगी। ‘हर घर बिजली’निश्चय के तहत राज्य के सभी इच्छुक घरों को दिसंबर‚ 2018 तक विद्युत-संपर्कता उपलब्ध करा दी जायेगी।

बिहार में जिला एवं ग्रामीण सड़कों तथा पुल-पुलियों का वृहद् जाल बिछाकर‚ राज्य के सुदूर क्षेत्र से 6 घंटे में राजधानी पटना पहुंचने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है और अब इस लक्ष्य को 5 घंटे निर्धारित किया गया है। इसके लिए कार्य योजना बनाकर निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। नई आधारभूत संरचना के निर्माण के साथ-साथ पथों के अनुरक्षण का भी कार्य किया जा रहा है। केन्द्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय उच्च पथों के चौड़ीकरण एवं वृहद पुलों के निर्माण की महत्वपूर्ण योजनाओं को स्वीकृति दी है और कई पर कार्य भी प्रारंभ हो गया है।

राज्य में त्वरित औद्योगिक विकास के लिए बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति‚ 2016 लागू की गई है। औद्योगिक निवेश को अधिक सहज बनाने के उद्देश्य से बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन अधिनियम‚ 2016 को लागू किया गया है। इस नीति के अंतर्गत अब तक निवेश के 652 प्रस्तावों कोप्राथमिक स्वीकृति दी गई है‚ जिसमें लगभग 5 हजार करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इसमें से अब तक 55 इकाइयों को कुल 954 करोड़ रूपये के विŸkhय प्रोत्साहन की स्वीकृति दी जा चुकी है।

विकासात्मक कार्यों का लाभ समाज को तब तक शत प्रतिशत नहीं मिलता है‚ जबतक कि समाज व्याप्त कुरीतियों के प्रति जागरूक नहीं हो। इसलिए समाज-सुधार के कार्यक्रमों को भी पूरी तत्परता के साथ लागू किया जाना आवश्यक है। समाज में व्याप्त अधिकांश कुरीतियों से सबसे अधिक महिलायें प्रभावित होती हैं। इस पृष्ठभूमि में सरकार ने पूर्ण शराबबंदी लागू की तथा उसके बाद पूर्ण नशाबंदी का संकल्प लिया है। संपूर्ण बिहार में इसके प्रति जनसामान्य‚ विशेषकर महिलाओं‚ युवाओं एवं बालक-बालिकाओं में काफी उत्साह है। सभी के सहयोग से शराबबंदी एक सामाजिक अभियान का रूप ले चुकी है। पूर्ण शराबबंदी से समाज अधिक सशक्त‚ स्वस्थ एवं संयमी हुआ है‚ जिसका अतुल्य प्रभाव बिहार की प्रगति में परिलक्षित हो रहा है। शराबबंदी के कारण परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार तथा पारिवारिक हिंसा‚ घरेलू कलह एवं सामाजिक अपराध में   कमी आई है।

 

 

राज्य सरकार ने सामाजिक सुधार की इस कड़ी को आगे बढ़ाते हुए गत वर्ष 2 अक्टूबर से बाल-विवाह एवं दहेज-प्रथा के उन्मूलन हेतु राज्यव्यापी अभियान प्रारंभ किया है। बाल-विवाह और दहेज-प्रथा के विरूद्ध वर्तमान में कानूनों के प्रवृŸk होने के बाद भी दोनों कुरीतियाँ समाज में व्याप्त हैं और इसलिए इनके विरूद्ध सभी के सहयोग से सामाजिक अभियान चलाना आवश्यक था। बाल-विवाह एवं दहेज प्रथा उन्मूलन अभियान के माध्यम से शिशु मृत्यु दर‚ मातृ मृत्यु दर‚ लैंगिक असमानता‚ कुपोषण एवं बौनापन‚ लड़कियों में असुरक्षा की भावना‚ अशिक्षा आदि समस्याओं को कम करने में सहायक होगा। 21 जनवरी को बाल-विवाह तथा दहेज-प्रथा के विरूद्ध बिहारवासियों ने लगभग 14 हजार किलोमीटर लंबी मानव-श्रृंखला बनाकर इस अभियान के समर्थन में अपने संकल्प का प्रकटीकरण किया है।

बिहार गौरवशाली इतिहास और संपन्न विरासत से परिपूर्ण है। विकास के साथ-साथ कला-संस्कृति एवं पर्यटन क्षेत्र के संवर्द्धन पर राज्य सरकार का विशेष ध्यान है। बीते वर्ष 23 से 25 दिसम्बर तक श्री गुरू गोबिन्द सिंह जी महाराज के 350वें प्रकाश पर्व का ‘शुकराना समारोह’सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने इस आयोजन में भाग लिया। बापू के ‘चम्पारण सत्याग्रह’की ऐतिहासिक स्मृति के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वर्ष 2017-18 को ‘चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह’के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर महात्मा गाँधी एवं चम्पारण-सत्याग्रह से जुड़े स्थलों पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये गये हैं। इस अवधि में बापू के आदर्श एवं संदेशों को घर-घर तक पहुँचाया गया है तथा बच्चों को महात्मा गाँधी के विचारों एवं आदर्शों से अवगत कराया जा रहा है। चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह का समापन आगामी ‘बिहार दिवस’के अवसर पर किया जायेगा। 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम’के महानायक बाबू वीर कुँवर सिंह के 160 वें विजयोत्सव के अवसर पर 23 से 25 अप्रैल‚ 2018 तक तीन दिवसीय विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा।

हमारे राज्य में सभी जाति‚ धर्म और सम्प्रदाय के बीच अनुकरणीय समन्वय है। सरकार की कामना है कि समाज में सद्भाव एवं भाईचारा का वातावरण कायम रहे। गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर मैं आप सबका आह्वान करता हूँ कि बिहार को आर्थिक रूप से सबल तथा सामाजिक एवं नैतिक रूप से सशक्त बनाने में अपनी सक्रिय भागीदारी निभायें। गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक बार पुनः आप सबको अपनी शुभकामनाएँ देता हूँ।

आप सभी तीन बार ‘जय हिन्द’के उद्घोष को मेरे पीछे दुहरायेंगे।

जय हिन्द।   जय हिन्द।    जय हिन्द।

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