स्थापना दिवस सह कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन

साहित्य

गौतम

भागलपुर। स्थानीय मोहदीनगर के कागजी टोला लेन स्थित विषहरी स्थान परिसर में मानव कल्याण समिति ने अपना तीसरा स्थापना दिवस सह वार्षिकोत्सव समारोह का आयोजन आज तीन चरणों में सम्पन्न किया। पहले चरण में सन्तमत सत्संग, दूसरे चरण में समिति का लेखा-जोखा व प्रतिवेदन प्रस्तुती सह विचार गोष्ठी और तीसरे चरण में सर्वभाषा कवि सम्मेलन का आयोजन कर इस समारोह को ऐतिहासिक व अविस्मरणीय बना दिया। कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन पूर्व प्राचार्य महादेव प्रसाद साह, अध्यक्ष परशुराम पोद्दार, मुख्य अतिथि राकेश रंजन केशरी, विशिष्ट अतिथि सत्यनारायण मंडल, सम्मानित अतिथि विधा प्रसाद झा, समारोह के स्वागताध्यक्ष सह अंग उत्थान आन्दोलन समिति के अध्यक्ष गौतम सुमन, समिति सचिव योगेन्द्र पाल, कोषाध्यक्ष धीरज पंडित आदि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। तत्पश्चात समिति की ओर से देश-राज्य व समाज की सलामती व प्रगति हेतु प्रार्थना सभा हुई और फिर आगत अतिथियों का स्वागत समिति सदस्यों द्वारा माल्यार्पण कर किया गया । तत्पश्चात समिति सचिव योगेन्द्रपाल ने समिति सदस्यों का लेखा-जोखा की प्रतिवेदन प्रस्तूत किया, जिस पर सर्वसम्मति से समिति अध्यक्ष श्री पोद्दार ने अपनी मुहर लगा दी। मंचासीन अतिथियों ने समिति कार्यों व उद्देश्यों की प्रशंसा करते हुए सराहना की और लोगों को एकजुट होकर समिति से जुड़ने की अपील की। इस मौके पर निर्णय लिया गया कि घर-आँगन, सड़क व नदी-पोखर किनारे एवं मैदान आदि जगहों पर दो पौधे लगाने वाले समिति के कार्यकारिणी सदस्य कहलायेंगे। समिति की ओर से लोगों से अनुरोध किया गया कि वे अपने पुरानी किताबों-पुराने कपड़े आदि को निःस्वार्थ भाव से गरीब मजलूमों को भेंट स्वरूप दान कर मानवता का सबूत पेश करें। मौके पर गौतम सुमन ने कहा कि मानव कल्याण में लीन रहना ही  सच्ची साधना और तप की निशानी है। उन्होंने कहा कि मानव सेवा से बढ़कर कोई धर्म-जाति या मजहब नहीं है। गोष्ठी में भागलपुर में 25 वर्षों से बंद पड़े इकलौते का-ऑपरेटिव स्पीनिंग की दुर्दशा और स्थानीय मोहदीनगर के अतिरिक्त स्वास्थ्य केन्द्र की दशा-दुर्दशा पर विस्तृत चर्चा हुई और इस दिशा में राज्य सरकार एवं स्थानीय जिला प्रशासन से सकारात्मक पहल की अपेक्षा की गई। उद्घाटनकर्ता श्री साह ने समिति को हर संभव  सहयोग देने का बचन देते हुए कहा कि संस्था आस्था से चलती है। उन्होंने इस समिति की मानव सेवा की भावना से लोगों को सबक लेने का आग्रह किया और कहा कि सही मायने समाज के प्रहरी ऐसे ही सेवक होते हैं। तत्पश्चात तीसरे व अंतिम चरण में कवि सम्मेलन आरंभ हुआ, जिसकी अध्यक्षता कविवर विष्णु मंडल विकल और संचालन डॉ प्रेमचन्द पांडेय ने की। कविता पढ़ने वालों में श्री विकल व श्री पांडेय के अलावा हास्यावतार रामावतार राही, आकाशवाणी भागलपुर की उदघोषिका सह कवियत्री सांत्वना साह, नीरापाल, प्रीतम विश्वकर्मा कवियाठ, बच्चू चौधरी अकेला, शिक्षाविद् महेश मणि, कवि धीरज पंडित, गौतम सुमन, डॉ जयंत जलद, जगदीश यादव एवं कपिलदेव ठाकुर मंचासीन हुए ।मंचासीन इन कवियों को समिति की ओर से पुष्पगुच्छ एवं डायरी-कलम से सम्मानित कर उनसे समिति के लोगों ने देश की हालात पर इन्क्लाबी तेवर के साथ कलम चलाने की अपील की। तत्पश्चात कवि सम्मेलन कपिलदेव ठाकुर द्वारा प्रस्तुत किये गए सरस्वती बंदना से आरंभ हुआ। काव्यपाठ करते हुए प्रीतम विश्वकर्मा ने अपनी कवियाठी लहजे में सुनाया कि ‘कल क्या भाव बिकेगा सामान नहीं मालूम, क्या बिकेगा इंसान का ईमान नहीं मालूम’।वहीं गौतम सुमन ने कचहरी की नौवत घर नहीं लाने की अपील करते हुए जब ‘कचहरी ही गूँडों की खेती है बंधु, यहीं जिंदगी उनको मिलती है बंधु; खुलेआम कातिल यहाँ घूमते हैं, सिपाही-दारोगा चरण चूमते हैं…’ सुनाया तो पूरा माहौल गुदगुदा उठा। डॉ जयंत जलद ने ‘माँगू प्रभू से यही वरदान, सदा करूँ मानव कल्याण’ सुनाकर खूब तालियाँ बंटोरी। कवियत्री सांत्वना साह ने बाल गीत ‘कक्का रे कक्का, आम दे पक्का ‘सुनाकर उपस्थित बच्चों व श्रोताओं का मन मोह लिया। कवि धीरज पंडित ने गीत सुनाते हुए’तुम हो ऐसे गीत प्रिये, जो लिखता हूँ और पढ़ता हूँ ‘लोगों को हँसने पर विवश कर दिया। वहीं हास्यावतार रामावतार राही ने बोतल में हिन्दुस्तान जमाना देखेगा सुनाकर लोगों को खूब झुमाया। प्रेमचन्द पांडेय ने भोजपुरी में रचना पाठ कर माहौल को काब्यमय बना दिया तो वहीं कविवर विष्णु मंडल विकल, बच्चू चौधरी अकेला, जगदीश यादव एवं महेश मणि ने शेरो-शायरी और रचना पाठ से देश की दशा-दुर्दशा एवं सरकारी तंत्र व व्यवस्था पर चोट कर तालियों की गूँज से आस-पास के लोगों को भी काव्य स्थल तक आने पर मजबूर कर दिया। इस मौके पर दीपक सिंह, विपीन गुप्ता, महेश साह, सुबोध पंडित, गिरधर गुप्ता, संजय साह, निर्मला देवी, बेबी देवी, ध्यानेश्वर साह, वासुदेव साह, विष्णु पंडित, शिव कुमार पंडित, बिनोद पंडित, श्याम लहेरी, जवाहर पंडित सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे। अंत में समिति अध्यक्ष परशुराम पंडित ने कहा कि खुद रोकर दूसरों को हँसाना ही मानव सेवा है यह लोगों को मुझ लाचार अपंग को देखकर सीखना चाहिए और उन्हें मानव कल्याण में आगे आना चाहिए ।

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