अखिलेश को पसंद नहीं आया, योगी ने महोत्सव मनाया

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डैसक्। राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि ‘स्वराज्य मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है, मैं इसे लेकर रहूंगा’ यह वह वाक्य है जिसने देश को जोड़ दिया। यह साहित्य बन गया है। इसे युवा पीढ़ी याद रखे, इसके लिए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सुझाव दिया लेकिन पसंद नहीं आया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कहा तो उन्होंने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक महोत्सव मनाया और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों को सम्मानित किया। वे रविवार को केंद्रीय ¨हदी संस्थान में संस्कार भारती के सहयोग से आयोजित ‘साहित्य सृजन से राष्ट्र अर्चन’ अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि साहित्य का समाज पर प्रभाव पड़ता है। 1916 के कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन में पहली बार लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने स्वराज्य मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है वाक्य बोला था। चुटकी लेते हुए कहा कि इसके 100 साल पूरे होने पर 2016 में समारोह होना चाहिए था। उस समय भी अपनी ही सरकार थी लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को यह पसंद नहीं आया। मगर, अब वीर सावरकर सहित स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को युवा पीढ़ी साहित्य के माध्यम से ही याद रख सकती है। इस दिशा में साहित्यकारों को काम करना चाहिए।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साहित्य से भारतीयता का बोध- राज्यपाल राम नाईक ने केंद्रीय ¨हदी संस्थान के नवनिर्मित सभागार का नाम अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखने पर कहा कि उनके साथ जनसंघ से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक काम करने का मौका मिला। उनके साहित्य से भारतीयता का बोध होता है। उन्होंने देश के अलग भाषा और विचार के लोगों को एक साथ लेकर चलने का काम किया। संयुक्त राष्ट्र संघ के मंच पर पहली बार ¨हदी के लिए आवाज उठाई। उनके विचार और साहित्य पर चिंतन होना चाहिए।

वह कलंक था- कासगंज ¨हसा के सवाल पर राज्यपाल ने कहा कि वह कलंक था लेकिन पिछले 10 महीने में योगी सरकार ने अपराध की रोकथाम के लिए अच्छा काम किया है। बदमाश पकड़े जा रहे हैं।

साहित्य के शब्दों की ताकत से कैंसर पर जीत

कैंसर दिवस के उपलक्ष्य में कहा कि 24 साल पहले मुझे भी कैंसर हुआ था। दवा के साथ इच्छा शक्ति से कैंसर पर जीत हो सकती है। यह काम साहित्यकार कर सकते हैं, उनके शब्दों में ताकत होती है।

एक्सीडेंट से बन गया लेखक- राज्यपाल रामनाईक ने कहा कि मैं लेखक नहीं हूं, एक्सीडेंट से लेखक बन गया। एक समाचार पत्र ने लेख लिखने के लिए कहा, चैरेवेति चरैवेति यानी चलते रहो चलते रहो पुस्तक लिखी यह चार भाषाओं में प्रकाशित हो चुकी है। उर्दू में भी प्रकाशित हुई है।

विवि की परीक्षा में नहीं होगी नकल- उन्होंने कहा कि विवि की परीक्षाओं में नकल नहीं होगी। इसके लिए 10 फरवरी को सभी विवि के कुलपतियों की कानपुर में बैठक है। सभी विवि के दीक्षा समारोह हो चुके हैं, समय से परीक्षाएं होने के साथ परीक्षाफल भी आएगा। किसी को मा‌र्क्सशीट सहित अन्य समस्या है तो शिकायत करे उसकी समस्या का समाधान किया जाएगा।

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