नेता बनने के लिए भी उम्र तय हो: गौतम

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भागलपुर। अंग उत्थानान्दोलन समिति,बिहार-झारखंड सह अंग मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौतम सुमन ने सरकार द्वारा जारी फरमान कि 50 साल से ज्यादा उम्र के कर्मचारियों को कार्य कुशलता की समीक्षा के आधार पर जबरन रिटायर किया जाएगा पर आलोचना करते हुए देश के सभी लोगों सहित सामाजिक,राजनीतिक,आध्यात्मिक,साहित्यिक,सांस्कृतिक,शैक्षणिक,व्यवसायिकऔर औधोगिक आदि संगठनों से आगे आकर शपथ लेने की अपील किया है कि पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक ऐसे किसी नेता को वोट देकर उन्हें नहीं चुनेंगे, जो 50 वर्ष से अधिक उम्र के हों , ताकि देश की कार्य कुशलता प्रभावित न हो सके और अपना भारत और महान बन सके । उन्होंने इसके लिए कुल 15 बिन्दुओं की चर्चा करते हुए देश में चुनावी नियम-कायदे समान रूप से लागू करने के लिए महामहिम राष्ट्रपति,राष्ट्रीय चुनाव आयोग,प्रधानमंत्री आदि से इन बिन्दुओं पर ध्यानाकृष्ट करते हुए अनिवार्य रूप से इस पर सकारात्मक पहल करने का अनुरोध किया है । उन्होंने बताया कि- क्यों नहीं नेताओं को भी पचास साल की उम्र में रिटायर कर दिया जाय ?,क्यों नहीं , नेताओं को भी पुरानी पेंशन से वंचित किया जाय और इस पर एनपीएस लागू किये जाएँ ?, क्यों नहीं , नेताओं को विधानसभा सदस्य बनने के लिए स्नातक व लोकसभा सदस्य बनने के लिए परास्नातक होना अनिवार्य कर दिये जाएँ ? क्यों नहीं कानून मंत्री बनने के लिए कानून की डिग्री अनिवार्य कर दिये जाएँ ?,स्वास्थ्य मंत्री बनने के लिये एमबीबीएस की डिग्री अनिवार्य कर दिये जाएँ ?,इसी तरह समाज कल्याण के लिए समाजशास्त्र की डिग्री अनिवार्य हों, मानव संसाधन के लिए एम.एड की डिग्री अनिवार्य हो, वित्त मंत्री को अर्थशास्त्री होना अनिवार्य किया जाय,इसी प्रकार सभी मंत्रीयों की योग्यता का मानक निर्धारित किये जाएँ साथ ही क्यों नहीं इन नेताओं को मिल रहे फ्री का डीजल, पेट्रोल, फोन की सुविधा, हवाई सुविधा, रेल सुविधा सहित तमाम सुविधाओं में, जिसमें प्रतिवर्ष अरबों रूपये खर्च होते हैं उसमें कटौती किये जाएँ ?,क्यों नहीं सभी नेताओं के खाते सार्वजनिक करवाए जाएँ,क्यों नहीं नेताओं की पुरानी पेंशन,मोटी तनख्वाह,सब्सिडी द्वारा भोजन को बंद किये जाएँ; जिसपर सरकार प्रतिवर्ष अरबों रूपये पानी की तरह खर्च करती हैं,क्यों नहीं नेताओं के पद से हटने के बाद फ्री मेडिकल सुविधा बंद कर दिये जाएँ;जिस पर देश को करोड़ों रूपये का नुकसान होता हैं ? उन्होंने सीधे तौर पर सरकार से जानना चाहा है कि क्या 50 साल का कर्मचारी बूढ़ा और 50 साल का नेता जवान होता हैं और यह कौन सा मानक हैं ? नेताओं के पास क्या राहु व केतु वाला अमृत कलश है, जिससें यह पचास की उम्र में युवा नेता हो जाते हैं ? उन्होंने जानना चाहा है कि जब जेल में बंद अपराधी चुनाव लड़ने के लिए स्वतंत्र है फिर जेल में बंद विचाराधीन बंदियों को मताधिकार की स्वतंत्रता से क्यों वंचित रखा गया है ?और अभी हाल ही में चुनावी नियमों में बदलाव कर 2008 के बाद हुए तीसरे बच्चे के माता-पिता को चुनाव लड़ने पर प्रतिबंद लगा दिया गया है तो फिर 2008 से पूर्व तीन से अधिक बच्चे वालों को चुनाव लड़ने की स्वतंत्रता कैसे और क्यों ? क्यों नहीं इस नियम को एक कर दिया जाता है कि तीन बच्चे वाले चुनाव लड़ ही नहीं सकते ।क्यों नहीं बच्चों की संख्यां पर ये सन या ई0 के बैरियर को हटा दिया जाय ?
उन्होंने अन्त में कहा है कि जब नेतागण खुद की तनख्वाह लाखों में करते हैं तो पार्टी या दलों के कोई भी नेता विरोध नहीं करते हैं,बल्कि सभी मिलकर मेज और टेबल थपथपाने लगते हैं । अध्यक्ष श्री सुमन ने सवालिया लहजे में सरकार से पुछा है कि क्या नेताओं की तनख्वाह की बेतहाशा वृद्धि से अरबों रूपये का भार देश पर नहीं पडता ? उन्होंने इस तरह की गजब और अजब सोच की निन्दा करते हुए कहा कि इन नेताओं द्वारा जब कर्मचारियों, अधिकारियों, शिक्षकों को पचास वर्ष में हटाने पर विचार किया जा सकता है तो यह हमारे सभी बिन्दुओं पर विचार क्यों नहीं किया जा सकता ? उन्होंने कहा कि जनहित के इस अहम मुद्दों को लेकर वे घर-घर जाकर लोगों को गोलबंद करेंगे और फिर समान नियम-समान कानून के लिए क्रांति का शंखनाद करेंगे ।
-गौतम सुमन(राष्ट्रीय अध्यक्ष)
अंग उत्थानान्दोलन समिति,बिहार-झारखंड सह अंग मुक्ति मोर्चा ।
भागलपुर संपर्क सूत्र : 9934880594,9709432576.

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