अंगिका भाषा के समुचित सम्मान व अधिकार के लिए कहलगाँव में मंत्री श्री वर्मा को सौंपा अनुरोध पत्र

अंग क्षेत्र की चर्चा

नीतिश कुमार ने 23 जून 2015 को अंगिका अकादमी का गठन किया

सुशासन व इस लोकतंत्र में किसी भी लोकभाषा के साथ उपेक्षित रवैया अनुचित है, मातृभाषा के बगैर लोग गूँगे हो जाते हैं और फिर अपनी अस्मिता व अस्तित्व को सम्मान की माँगें लोगों का अधिकार है कोई भीख नहीं है।  

गौतम सुमन

कहलगाँव(भागलपुर)। स्थानीय श्यामसुंदर इंटरस्तरीय स्कूल, रामपुर के 60 वें स्थापना दिवस के मौके पर पर स्कूल के भूमिदाता रामसुंदर मंडल की प्रतिमा अनावरण सह स्कूल परिसर में ही कला भवन का उदघाटन करने आए आज सूबे के शिक्षा सह विधि मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा का कई लोगों ने स्वागत किया। इस मौके पर उपस्थित अंग उत्थानान्दोलन समिति,बिहार-झारखंड के सदस्यों ने भी मंत्री श्री वर्मा का स्वागत किया और कहा कि अंग की समृद्धि के बगैर बिहार की समृद्धि कदापि संभव नहीं हो सकता क्योंकि अंग के बिना बिहार बहियार की तरह है। इस समिति की ओर से बिहार के लगभग 4 करोड़ लोगों की भाषा अंगिका के समुचित सम्मान व अधिकार के सवाल को लेकर मंत्री श्री वर्मा को एक अनुरोध पत्र सौंपा गया ।सौंपे गये इस अनुरोध पत्र के जरिए समिति अध्यक्ष गौतम सुमन ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा है कि अंग क्षेत्र की लंबित उधार चुक्ता करो के तहत अंग वासियों की पुकार और लोकतंत्र में लोकभाषा अंगिका पर मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने अपनी उदारता दिखाते हुए विगत 23 जून 2015 को अंगिका अकादमी का गठन किया है ।उन्होंने कहा है कि इससे पूर्व ति.मं.भा.वि.वि. में अंगिका भाषा की पढ़ाई वर्षों से हो रही है, झारखंड सरकार द्वारा सिपाही और शिक्षक भर्ती के अलावा झारखंड लोकसेवा आयोग एवं अन्य परीक्षाओं में 30 प्रतिशत अंकों का प्रश्न अंगिका में पुछे जाते हैं, आकाशवाणी एवं दूरदर्शन से निरंतर अंगिका भाषा में कार्यक्रमों का प्रसारण हो रहे हैं, राष्ट्रभाषा परिषद द्वारा अनेक विधा में अंगिका साहित्य का प्रकाशन हुआ है, साहित्य अकादमी दिल्ली द्वारा  कई अंगिका साहित्य का प्रकाशन और साहित्यिक आयोजन हुआ है और विभिन्न सांसदों ने अपने स्तर से  लोकसभा में अंगिका भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की आवाज उठाते रहे हैं ।

अध्यक्ष श्री सुमन ने अंग की आवाज को समेटकर अपनी समिति की ओर से अंगिका भाषा की पढ़ाई स्कूल स्तर से लेकर कॉलेज तक करवाने, अंगिका भाषा के शिक्षकों की नियुक्ति करने, अंगिका अकादमी का विस्तार एवं स्वतंत्र निदेशक उपलब्ध कराकर इसके अध्यक्ष पद पर कर्मठ, युवा, अंगिका भाषा के ज्ञानी एवं किसी कारगर व्यक्ति को आसीन कराने, अंगिका साहित्यकारों के लिए पुस्तक प्रकाशन एवं इनके सम्मान के लिए एक साहित्य आश्रम का निर्माण करने, पूर्व की तरह भागलपुर में सरकारी स्तर पर अंग महोत्सव एवं कार्यक्रम कराने और अंगिका भाषा के समुचित सम्मान व अधिकार के लिए इसे भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए अपनी आवाज देकर अपना समर्थन देने आदि की माँग को लेकर एक अनुरोध पत्र सौंपा। मंत्री श्री वर्मा ने इस पर सकारात्मक पहल करने का आश्वासन दिया और कहा कि सुशासन व इस लोकतंत्र में किसी भी लोकभाषा के साथ उपेक्षित रवैया अनुचित है क्योंकि मातृभाषा के बगैर लोग गूँगे हो जाते हैं और फिर अपनी अस्मिता व अस्तित्व को सम्मान की माँगें लोगों का अधिकार है कोई भीख नहीं है। अनुरोध पत्र सौंपते समय कई गणमान्यों सहित समिति के शिष्टमंडल में अध्यक्ष गौतम सुमन के साथ डॉ.जयंत जलद, बाबा मनमौजी कर्णअंगपुरी, सुरेश दास, राजेन्द्र साह, कुन्दन कुमार, मो.रूस्तम, अजय शर्मा आदि उपस्थित थे । 

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