नवोदय से रिटायर कलाकार आर्थिक तंगी के शिकार, इलाज कराने के लिए चंदे की दरकार

अंग क्षेत्र की चर्चा

रवि जी साहित्यकार के साथ-साथ ऐतिहासिक तथ्यों पर बड़ी महीनी से अनुसंधान करते हैं। आज इनकी खोज से आप को रू-ब-रू करा रहा हूँ।

रवि उद्देश्य

नवोदय से रिटायर कलाकार,  अब हैं आर्थिक तंगी के शिकार।

इलाज कराने के लिए अब, पड़ रही है चंदे की दरकार ।

सरकार भी नहीं सुनती, अब कौन करेगा उपकार

ये हैं श्री नन्द कुमार मिश्र. शांतिनिकेतन से मूर्तिकला और चित्रकला में स्नातक. इन्होंने ही मंदार पर्वत के नीचे समुद्र मंथन का स्टेच्यू बनाया जिसे आप इंटरनेट पर मंदार हिल या पर्वत सर्च करने पर सहज ही ढूंढ सकते हैं. ये प्रसिद्ध् मूर्तिकार रामकिंकर वैज के प्रिय शिष्य हैं. हाँ, व्ही रामकिंकर वैज जिन्होंने नेहरू जी के व्यक्तिगत आमंत्रण पर दिल्ली जाकर रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के सामने आज भी लगी यक्ष और यक्षिणी की मूर्ति बनाई है. इन मूर्तियों को गढ़ते वक्त भी श्री मिश्र उनके सहायक के तौर पर काम कर रहे थे. इन दिनों वह शांतिनिकेतन में शिक्षा प्राप्त कर रहे थे जिसकी कार्यशाला दिल्ली में चल रही थी.
आज श्री मिश्र देवघर के पुनसिया में अपने अर्धनिर्मित आवास में नवोदय विद्यालय, शक्तिनगर, बाँका से रिटायर करने के बाद रह रहे हैं. इनकी दोनों किडनियां फेल हैं. इनको सप्ताह में दो बार डायलिसिस कराना पड़ता है. इसका भी खर्च विकराल है. फिर, विडम्बना तो देखिये कि नवोदय विद्यालय अपने कर्मचारियों को पेंशन नहीं देता है. ज़ाहिर है कि बिना पेंशन का रोगी व्यक्ति क्या कर सकता है? ऐसे में पैसे की कमी को पूरा करने के लिए कला मर्मज्ञ श्री मिश्र ने हाल में ही देवघर के सर्किट हॉउस में एक प्रोजेक्ट भी पूरा किया जिसमें उनको कांवरियों का एक जत्था देवघर मंदिर की और जाता हुआ दिखाना था. यह सब डॉक्टर की फीस भरने की कवायद थी.
इस आलोक में मीडिया की निगाह भी इनपर नहीं पड़ती है जिससे कोई इनकी सहायता करे. इस वक्त ये आर्थिक कमी से जूझ रहे हैं. ऐसे में किसी भी रूप में इनकी सहायता की जाए तो मानवता के लिए उठाया गया एक कदम होगा.

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