मित्र कीट का संरक्षण आवश्यक

कृषि

पटना। खेतों में जो कीड़े पाये जाते हैं उसमें अधिकतर जो कीट नजर आते है वे मित्र कीट होते हैं। ये कीट फसल को नुकसान पहुचाने वाले कीट को खाकर अपना जीवन का चक्र पूरा करते हैं। मित्र कीट देखने में प्रायः रंगीन एवं फसलों पर भागते दौड़ते नजर आते हैं परन्तु ये कीट अत्यन्त कमजोर प्रकृति के होते हैं। जैसे ही हम रासायनिक कीटनाशी का छिड़काव करते हैं सबसे पहले मित्र कीट मरते हैं।

वत्र्तमान समय में दलहन फसल प्रायः फूल की अवस्था में है, ऐसी स्थति में किसी भी प्रकार का रसायनों का छिड़काव नहीं करना चाहिए। कीड़ों से बचाव के लिए एलो ट्रैप, लाईट ट्रैप या फेरोमोन  ट्रैप का व्यवहार काफी लाभदायक होता है। फेरोमोन ट्रैप लगाने से फलीछेदक कीट जो दलहनी फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुचाते हैं, के नर कीट आसानी से ट्रैप के अंदर फंस जाते है। ऐसा करने से फलीछेदक कीट के नर-मादा कीट का मिलन नहीं हो पाता है जिससे इनके अण्डे या लार्वा नहीं बनते हैं और फसल (नुकसान) क्षति से बच जाता हैं। आवश्यकतानुसार जैव-उत्पाद का भी छिड़काव कर फसल में लगने वाले कीट/व्याधि के प्रकोप से भी बचा जा सकता है।

रसायनों का कम व्यवहार होने से मित्र कीटों का संरक्षण होगा तथा वातावरण भी रसायन (जहर) से मुक्त रहेगा।

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