आखिर लालू यादव ही टारगेट क्यों …………………………….

आपका विचार

पत्रकार प्रियदर्शी ठाकुर के फेसबुक वॉल से

भारतीय राजनीत में लालू यादव एक ऐसा शक्सियत का नाम है जिसके रहते दबे कुचले वर्ग के साथ अन्याय करना मुश्किल ही नही नामुमकिन है ….लालू यादव एक विचार है जिसने दबे कुचले, समाज के अंतिम पंक्ति के लोगों को जीना सिखाया है! उसको बताया की वो भी इस समाज का हिस्सा है। उसको भी जीने का अधिकार है, मुख्यमंत्री रहते लालू जी ने समाज के अंतिम पंक्ति के बीच जो भेद भाव था, उसको समाप्त किया। लालू जी का सोच था विकसित बिहार तभी होगा, जब अंतिम पंक्ति के लोगों का विकास होगा। लालू जी ने गरीबों को जो आइना दिखाया वह स्वर्णिम इतिहास में जाना जाएगा! लालू यादव देश के लोकप्रिय नेता है, उनके बढ़ते लोकप्रियता को कुचलने के लिए बड़े पैमाने पर मीडिया के माध्यम से लालू जी के छवि को धूमिल करने का षड़यंत्र रचा गया, लालू यादव को एक खास जात का नेता बताकर महिमा मंडित किया गया। जबकि वे हर बिरादरी के दबे कुचले वर्ग के मसीहा है, लालू यादव से डायरेक्ट प्रतिस्पर्धा का मदृदा किसी में नहीं था, आर.एस.एस. वालों ने लालू जी के साथ षड़यंत्र रचा, लालू यादव को भ्रष्टाचारी कहने वाले जरा अपने कलेजा पर हांथ धर कर पुछे उसको समझ में आ जाएगा कौन भ्रष्टाचारी है। आज अमित शाह के बेटे जय शाह पर कोई टिप्पणी नही करता है। ब्यापम घोटाला कोई मुद्दा ही नही है! सृजन घोटाला नीतीश कुमार एवं सुशील मोदी का नाम आते ही टांय-टांय फिस हो गया और एक लालू जी को जेल भेजकर आर.एस.एस. वाले जश्न मना रहे है। लालू जी ने बिहार में साबित कर दिया की वे एक मात्र समाजिक न्याय का लड़ाई लड़ने वाला नेता है, जो टूट सकता है पर झूक नही सकता। नीतीश कुमार जी तो बिलकुल बौना है, लालू जी के सामने जिन्हें सिर्फ कुर्सी से मोह है। आज तो महाजंगलराज है। बिहार में हर जगह घोटाला दर घोटाला किसी को नहीं दिख रहा है। सृजन घोटाला, शौचालय घोटाला, खाद्व आपूर्ति विभाग में जी.पी.एस. घोटाला, लोड सेल घोटाला, खनन विभाग में जी.पी.एस. घोटाला, छात्रवृत्ति घोटाला, शिक्षा विभाग में प्रकाशन घोटाला, अखबार में विज्ञापन घोटाला, गव्य विकास में पशु अनुदान घोटाला,  मनरेगा घौटाला।

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