नई दिल्‍ली में अंतर्राष्‍ट्रीय सौर गठबंधन के संस्‍थापन सम्‍मेलन के उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री के भाषण

अंतरराष्ट्रीय

दिल्ली। आज के ऐतिहासिक दिन का बीज नवंबर 2015 में Paris में 21वीं Conference of Parties के समय बोया गया था। आज उस बीज से हरे-भरे अंकुर निकल आये हैं। इस नन्हें पौधे की नई संम्भावनाओं में फ्रांस ने बहुमूल्य भूमिका निभाई है। International Solar Allianceका यह नन्हा पौधा आप सभी के सम्मिलित प्रयास और प्रतिबद्धता के बिना रोपा नहीं जा सकता था। और इसलिए मैं फ्रांस का और आप सबका बहुत बहुत आभारी हूँ। 121 सम्भावित देशों में से 61 Alliance को joinकर चुके हैं। 32 ने Framework Agreement को ratify भी कर दिया है लेकिन इस गठबंधन में हम सभी सहयोगी देशों के अलावा हमारे सबसे बड़े साथी हैं सूर्यदेवता जो बाहर के वातावरण को प्रकाश और हमारे संकल्प को शक्ति दे रहे हैं.

पृथ्वी पर जब जीवन ने अपनी आँखें खोली थी उसके भी करोड़ो साल पहले से सूरज लोक को प्रकाशित और अनुप्राणित करता आ रहा है। जापान से लेकर पेरु तक, ग्रीस हो या रोम, Egypt, इन्का और पूर्व माया परम्परा– हर सभ्यता ने सूरज को प्रतिष्ठा और महत्व दिया है। लेकिन भारतीय दर्शन में हज़ारो साल पहले से सूर्य को जो केंद्रीय स्थान दिया गया, वह अद्वीतीय है। भारत में वेदों ने हज़ारो साल पहले से सूर्य को विश्व की आत्मा माना है। भारत में सूर्य को पूरे जीवन का पोषक माना गया है। आज जब हम Climate Change जैसी चुनौती से निपटने का रास्ता ढूंढ रहे हैं तो हमें प्राचीन दर्शन के संतुलन और समग्र दृष्टिकोण की ओर देखना ही होगा।

हमारा हरित भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि हम साथ मिलकर क्या कर सकते हैं। मुझे महात्मा गाँधी के शब्द याद आते हैः ”The difference between what we do and what we are capable of doing would suffice to solve most of the world’s problems”. पूरे विश्व से नेताओं की आज यहां उपस्थिति इस बात की अभिव्यक्ति है कि solar energy मानव जाति की ऊर्जा जरूरतों को स्थायी रूप से पूरा करने का एक प्रभावी तथा किफायती समाधान उपलब्ध कराती है।

भारत में हमने दुनिया का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार कार्यक्रम शुरू किया है। हम 2022 तकrenewables से 175 गीगावाट बिजली उत्पन्न करेंगे जिसमें से 100 गीगावाट बिजली सौर उर्जा से होगी।
हमने इसमे से 20 गीगावाट installed solar power का लक्ष्य already हासिल कर लिया है। भारत में ऊर्जा की बढ़ोत्तरी अब परंपरागत ऊर्जा स्रोतों के बजाए renewables से अधिक हो रही है। भारत में, अटल ज्योति योजना का उद्देश्य अपर्याप्त बिजली वाले क्षेत्रों में solar energy आधारित street lights को install करना है। स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए Solar Study Lamp Scheme से 7 मिलियन बच्चों को रोशनी मिल रही है। अगर हम solar energy से दूसरी Technologies को जोड़ दें, तो परिणाम और भी अच्छे हो जाते हैं। उदाहरण के लिए, सरकार द्वारा 28 करोड़ एलईडी बल्बों के वितरण से पिछले तीन साल में न सिर्फ 2 बिलियन डॉलर से अधिक की बचत हुई है बल्कि 4 गीगा वाट बिजली भी बची। यही नहीं, 30 मिलियन टन कार्बन डाई ऑक्साईड भी कम बनी।

हम सिर्फ भारत में ही नहीं विश्व में भी solar क्रांति चाहते हैं। आप भारत में प्रशिक्षित सोलर mamas,जिनका अभी आपने गीत भी सुना, उनके भाषण भी सुने, उनका विडियो भी देखा. अब आप भलीभांति इन सोलर mamas से परिचित हो ही चुके हैं। उनकी कहानी अपने आप में प्रेरणादायक है। हमें ख़ुशी है कि ISA Corpus Fund में योगदान के अलावा ISA Secretariat की स्थापना के लिए 62 मिलियन अमेरिकी डॉलर का योगदान दिया है। मुझे यह घोषणा करते हुए भी ख़ुशी हो रही है कि हम ISA सदस्यों को प्रत्येक वर्ष सौर ऊर्जा में 500 training slots प्रदान करेंगे। हमने पूरे विश्व में 143 मिलियन अमेरिकी डॉलर के 13 सौर projects या तो पूरे कर लिये हैं या उनका क्रियान्वयन किया जा रहा है। भारत 15 अन्य विकासशील देशों में 1.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता27 और projects के लिए देनेवाला है। हमने projects preparation facility की स्थापना की है जो bankable projects design करने के लिएpartner देशों को consultancy support देगी। मुझे आज यह घोषणा करते हुए भी ख़ुशी हो रही है कि भारत सोलर technology के gap को भरने के लिएSolar Technology Mission भी शुरु करेगा। इस Mission का अंतर्राष्ट्रीय focus होगा और यह हमारी सारी सरकारी, तकनीकी तथा शैक्षणिक संस्थाओं को साथ मिलाकर सोलर क्षेत्र में R&D प्रयासों का नेतृत्व करेगा। प्रचुर मात्रा में हवा की तरह उपलब्ध solar energy का विकास और प्रयोग हमारी समृद्धि के अलावा पृथ्वी का कार्बन भार अवश्य कम करेगा।

हमें कुछ बिन्दुओं पर ध्यान रखना होगा। और वे हैं- एक ओर बहुत से देश हैं जिनमें सूरज साल भर चमकता है परन्तु संसाधनों और technology का अभाव सौर ऊर्जा के इस्तेमाल में आड़े आता है, रूकावट बनता है। दूसरी ओर ऐसे द्वीप समूह और देश हैं जिनके अस्तित्व को climate change के प्रभाव का सीधा-सीधा ख़तरा है। तीसरी बात यह है कि solar energy प्रकाश के लिए ही नहीं, बल्कि अन्य बहुत से प्रयोगों – यातायात, clean cooking, कृषि में solar pump और health care में भी उतनी ही उपयोगी हो सकती है। Solar energy के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए technology की उपलब्धता और विकास, आर्थिक संसाधन,कीमतों में कमी, storage technology का विकास, mass manufacturing, और innovation के लिए पूराeco system बहुत आवश्यक है।

आगे का रास्ता क्या है, यह हम सबको सोचना है। मेरे मन में ten action points हैं जो मैं आज आपसे साझा करना चाहता हूं। सर्वप्रथम है, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि बेहतर और सस्ती सोलर Technologyसबके लिए सुगम और सुलभ हो। हमें हमारे energy mix में solar का अनुपात बढ़ाना होगा। हमें innovation को प्रोत्साहित करना होगा ताकि विभिन्न आवश्यकताओं के लिए सौर समाधान प्रदान हो सके। हमें solar projects के लिए concessional financing और कम जोखिम का वित्त मुहैया कराना होगा।Regulatory aspects एवं मानकों का विकास करना होगा जो सौर समाधान अपनाने और उनके विकास को एक नई गति दें। विकासशील देशों में bankable solar projects के लिए consultancy support का विकास जरूरी होगा। हमारे प्रयासों में अधिक समावेशिता और भागीदारी पर बल दिया जाये। हमें centers of excellence का एक व्यापक network बनाना चाहिए जो स्थानीय परिस्थितियों और कारकों को ध्यान में रख सके। हमारी solar energy policy को विकास की समग्रता से देखें, ताकि SDGs की प्राप्ती में इससे ज्यादा से ज्यादा योगदान मिले। हमे ISA Secretariat को मज़बूत और professional बनाना चाहिए।

मुझे विश्वास है कि हम ISA के ज़रिये इन सभी action points पर गतिशील विकास कर आगे बढ़ पायेंगे। आज का यह पल हमारी यात्रा की शुरुआत मात्र है। हमारी यह Alliance हमारे जीवन को सूरज के प्रकाश से और भी भर सकती है। यह ‘Let us make the Sun brighter’ को भी सार्थक कर सकती है। हमेशा से भारतीय दर्शन की आत्मा ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ – यानि ‘The whole world is a family’ यदि हम पूरी पृथ्वी, पूरी मानवता की भलाई चाहते हैं तो मुझे विश्वास है कि निजी दायरों से बाहर निकलकर एक परिवार की तरह हम उद्देश्यों और प्रयासों में एकता और एकजुटता ला सकेंगे।

यह वही रास्ता है जिससे हम प्राचीन मुनियों की प्रार्थना – ‘तमसो मा ज्यातिर्गमय’ – यानि हम अंधकार से प्रकाश को चलें, को चरितार्थ कर पायेंगे।

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