अंगिका को झारखंड सरकार द्वारा द्वितीय राज्य भाषा के दर्जा देने से अंग की राजधानी में उड़े गुलाल

Ang Chetra ki charcha
खुशियों का इजहार करते अंगिका प्रेमी

झारखंड में अंगिका को मिले सम्मान पर खुशी की लहर,बंटी मिठाई।

अपने पड़ोसी राज्य झारखंड से सीख ले बिहार सरकार : अंगुआस

अंग-अंगिका की समृद्धि के बगैर बिहार की समृद्धि कतई संभव नहीं : गौतम

भागलपुर। झारखंड सरकार द्वारा अंगिका भाषा को द्वितीय राजभाषा के रूप में स्वीकार करने पर अंग उत्थान आन्दोलन समिति,बिहार-झारखंड के द्वारा गुरूवार को स्थानीय स्टेशन चौक पर हर्ष अभिनंदन सह आभार समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर रंग-अबीर उड़ाई गई एवं समिति की ओर से मिठाइयाँ बाँटी गई।
मौके पर समिति अध्यक्ष गौतम सुमन ने कहा कि झारखंड स्थित छः जिलों की लोकभाषा अंगिका को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिये जाने के अध्यादेश को मंजूरी देकर लोकभाषा के प्रति अपनी उदारता व सजगता दिखाने का सराहनीय कार्य किया है, उनके इस कार्य से अंग क्षेत्र में खुशी की लहर है। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार के इस सराहनीय कार्य की प्रशंसा किसी भी शब्दों में की जाय,कम है। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार द्वारा लोकभाषा अंगिका के प्रति इस तरह की उदारता व सजगता से बिहार सरकार को भी सीख लेनी चाहिए, क्यों कि बिहार स्थित पन्द्रह जिलों में लगभग चार करोड़ लोगों के द्वारा न केवल अंगिका बोली जाती है बल्कि वे अपनी साँसों में इस अंगिका भाषा को रचा-बसाकर जीते-मरते हैं। उन्होंने कहा कि अंग-अंगिका की समृद्धि के बगैर बिहार की समृद्धि कतई संभव नहीं है। अंग-अंगिका के समुचित सम्मान व अधिकार के बगैर बिहार बहियार की तरह दिखती है, बावजूद इसके बिहार सरकार ने केवल एक अकादमी बनायी है। लेकिन यह गठन के दिशा में कोई सकारात्मक कार्य नहीं कर सका हैं, वहीं पांच जिलों वाले झारखंड ने पहले झारखंड लोक सेवा आयोग एवं झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा में अंगिका भाषा को शामिल किया है और अब इस अंगिका भाषा को राजकीय भाषा का दर्जा देकर अभूतपूर्व कार्य किया है।

गौतम सुमन

इस मौके पर पूर्व महापौर डॉ वीणा यादव ने कहा कि झारखंड सरकार लोकभाषा के प्रति तेजी से सजगता दिखाकर कुशल नेतृत्व को प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कुशलता हेतु बिहार सरकार से भी लोगों को अपेक्षा है।
सुधीर कुमार प्रोग्रामर ने कहा कि संघर्ष हमेशा रंग लाता है और लाएगा। अंगिका भाषा के समुचित सम्मान व अधिकार के लिए अब और संस्था नहीं बल्कि आस्था प्रकट करने के लिए उन्होंने अंगिका भाषियों से अपील की। डॉ जयंत जलद ने माँग की कि बिहार सरकार भी अंगिका भाषा को यथाशीघ्र दूसरी राजभाषा की श्रेणी में शामिल करे। पारस कुंज ने सवाल करते हुए कहा कि जब अंगिका भाषा के प्रति झारखंड सरकार इतनी उदारता व सजगता दिखा रही है तो बिहार सरकार द्वारा इस भाषा के प्रति उदासीनता क्यों ? वहीं धीरज पंडित ने कहा कि अब वह दिन दूर नहीं कि अंगिका भाषा भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल होकर अपना परचम लहराएगा।
अंत में समिति की ओर से इस कार्य हेतु झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास सहित विधायक अभित मंडल, अशोक भगत, लोबिन हैम्ब्रम,पूर्व विधायक राजेश रंजन एवं डॉ प्रदीप प्रभात आभार का प्रकट कर उपस्थित सभी लोगों को बधाई दी और झारखंड सरकार की जय घोष कर झारखंड सरकार जिंदाबाद के नारे लगाए।
इस मौके पर सुनील सिंह, कपिलदेव कृपाला, अभय कुमार भारती, राजाराम तिवारी, पवन कुमार, हरि यादव, महेश सिंह, मुरारी आदि उपस्थित थे।

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