संजय सिंह फेंकने की कला में माहिर हो गये: चितरंजन

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पटना। राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा है कि फेंकनेवालों के संगत में रहकर जदयू प्रवक्ता संजय सिंह खुद फेंकने की कला में माहिर हो गये हैं और दूसरों पर फेंकने का आरोप लगाते हैं।

राजद नेता ने कहा है कि संजय सिंह की राजनीति में इंट्री कैसे हुई है इसे बताने की जरूरत नहीं है और इनकी क्या विशेषता है उसे सभी लोग जानते हैं। उनके द्वारा ऐसे बयान दिये जा रहे हैं जैसे वे किसी आन्दोलन अथवा विचारधारा की उपज हों। उन्हें बताना चाहिए कि उनकी किस विशेषता पर रामविलास जी ने एमएलसी बनाया थे और इन्हें लोजपा से क्यों निकाला गया। इन्हें यह भी बताना चाहिए कि वे जदयू में कैसे आयें और जदयू इनकी किस विशेषता पर विधान पार्षद बनाया था। कल तक पानी पी.पी कर भाजपा नेता सुशील मोदी को गाली देने वाले आज किन परिस्थितियों में और किन कारणों से उसी सुशील मोदी के साथ गलबहियां कर रहे हैं।

तेजस्वी का तो जन्म ही एक राजनीतिक परिवार में हुआ है, जहां वे बचपन से राजनीति का पाठ पढ़ते रहे हैं। कई उतार-चढ़ाव देखें। आज उसी का परिणाम है कि अपने को राजनीति का धुरंधर मानने वाले नेताओं की बेचैनी और परेशानी का वे कारण बने हुए हैं और वे उन सब पर काफी भाड़ी पड़ रहे हैं।

जिस व्यक्ति ने आज तक वार्ड सदस्य का चुनाव भी लड़ने का साहस नहीं किया उस व्यक्ति द्वारा भारी जन-समर्थन से विधानसभा का चुनाव जीत कर आने वाले पर सवाल खड़ा करना एक भद्दा मजाक के अलावा कुछ नहीं है। तेजस्वी के मंत्री के रूप में 20 महीने का कार्यकाल उनके विकासोन्नमुख प्रशासनिक क्षमता और योग्यता का उदाहरण है। राजद पर सवाल खड़ा करने के पहले जदयू नेता को 2014 का लोकसभा चुनाव एवं अभी हाल में हुए उपचुनावों के परिणाम को देख लेना चाहिए। जिस पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं को तेजस्वी से आंख मिलाकर बात करने और उनके सवालों का जवाब देने का साहस नहीं हो रहा है। उस दल के प्रवक्ता की हैसियत ऐसी नहीं है कि वह नेता प्रतिपक्ष के बारे में कुछ बोलें।

राजद नेता ने कहा कि संभव है कि संजय जी विधान परिषद में पुनः जाने के लिए टी.टी.एम. फार्मूले के तहत ऐसा बयान दे रहे हों। लेकिन उन्हें मात्र विधान पार्षद बनने के लिए अमर्यादित और कुसंस्कारी बयानों से बचना चाहिए। क्योंकि जिस नाव पर वे चढ़े हुए हैं वह जल्द ही डूबने वाली है। फिर उन्हें किसी दूसरे नाव की हीं खोज करनी पड़ेगी।

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