फसलों को कीट एवं व्याधियों से बचाव आवश्यक

कृषि

पटना। कृषि विभाग से प्राप्त सूचनानुसार वर्त्तमान समय में फलदार वृक्षों में खासकर लीची के पौधों की विशेष देखभाल की आवश्यकता है। लीची में लगनेवाले प्रमुख कीटों एवं व्याधियों का प्रबंधन हेतु, लीची में लगने वाले दहिया कीट (Mealy bug), शिशु एवं मादा लीची के पौधों की कोशिकाओं का रस चूस लेते हैं जिसके कारण मुलायम तने और मंजर सूख जाते है तथा फल गिर जाते है। इसके आक्रमण पौधों की मुलायम फुनगियों पर होने से, पौधों की बढ़वार रुक जाती है एवं उपर काले रंग की फफूँद विकसित हो जाती है जो प्रकाश-संश्लेषण क्रिया को प्रभावित करते है। इसके प्रबंधन के लिए बाग की मिट्टी की निकाई गुड़ाई करनी चाहिए ताकि इसके कीट के अण्डे नष्ट हो जाय। पौधे के मुख्य तने के जड़ वाले भाग में 30 से.मी. चौड़ी अल्काथीन या प्लास्टिक की पट्टी लपेट देने से एवं उस पर कोई चिकना पदार्थ ग्रीस आदि लगा देने से, कीट के शिशु, पेड़ पर चढ़ नहीं पाते है। जड़ से 3 से 4 फीट तक धड़ भाग को चूना से पुताई करने पर भी इस कीट के नुकसान से बचा जा सकता है। इमिडाक्लोप्रीड 17.8: एस.एल. का 1 मि.ली. प्रति 3 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए।

लीची माईट कीट का व्यस्क एवं शिशु, पत्तियों के निचले भाग पर रहकर रस चूसते है, जिसके कारण पत्तियाँ भूरे रंग के मखमल की तरह हो जाती है तथा अन्त में सिकुड़कर सूख जाती है। इसे ‘इरिनियम’ के नाम से जाना जाता है। यह कीट मार्च से जुलाई तक ज्यादा सक्रिय रहते है। इसके प्रबध्ंन के लिए इस कीट से ग्रस्त पत्तियों एवं टहनियों को काट कर जला देना चाहिए। इस कीट का आक्रमण नजर आने पर सल्फर 80: घु.चू. का 3 ग्राम या डायकोफॉल 18.5: ई0सी0 या इथियॉन 50: ई.सी. का 2 मि.ली. या प्रोपरजाइट 57: ई.सी. या फेनप्रौक्सिमेट 5: का 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।

लीची का फल एवं बीज छेदक, फूल आने के समय मादा कीट पत्तियों पर अण्डे देती है, अण्डे से पिल्लू निकलकर नये फलों में घुस कर उसे खाते है जिसके कारण प्रभावित फल गिर जाते है। फलों की तुड़ाई विलम्ब से करने या वातावरण में अधिक नमी के कारण पिल्लू फल के डंठल के पास छेदकर फल के बीज एवं गुद्दे को खाते है, जिसके कारण फल में सड़न होता है एवं उत्पादन प्रभावित होता है। इसे लीची का स्टोन बोरर भी कहते है। उपज का बाजार मूल्य कीट ग्रसित होने के कारण कम हो जाता है। इसके प्रबंधन के लिए बाग की नियमित साफ सफाई करनी चाहिए। कार्टाप हाइड्रोक्लोराईड 50: एस.पी. का 1/2 ग्राम या एसिटामिप्रीड 20: एस.पी. का 1 ग्राम प्रति लिटर पानी के घोल बनाकर फलन की अवस्था में छिड़काव करना चाहिए।

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