“प्रतिभाओं को मत बाँटो आरक्षण की तलवार से….”

साहित्य

काव्य-यात्रा की वासंती काब्य धारा सह कवि सम्मेलन समारोह सम्पन्न

भागलपुर। करता हूँ अनुरोध आज मैं भारत की सरकार से, प्रतिभाओं को मत काटो आरक्षण की तलवार से। जातिवाद की नहीं समस्या मात्र गरीबीवाद है,जो सवर्ण हैं पर गरीब हैं,उनका क्या अपराध है। की पंक्तियों को पेश करते हुए जब अंग उत्थान आन्दोलन समिति,बिहार-झारखंड के अध्यक्ष गौतम सुमन ने अंग क्षेत्र के कवि-साहित्यकारों की ओर से राष्ट्र के नाम समर्पित कर कविता सुनाया तो पुरा माहौल काव्यमय होकर जोशिले तालियों से गूँज उठा। मौका था राष्ट्रीय-साहित्यिक व सांस्कृतिक मंच ‘काव्य-यात्रा’ द्वारा स्थानीय ईशाकचक स्थित 12 नं.गुमटी के अमितालय में भारतीय नव वर्ष के मौके पर वासंती काव्य धारा सह कवि सम्मेलन आयोजन का ।

आयोजित समारोह के मुख्य अतिथि डॉ.प्रेमचन्द पांडेय,विशिष्ट अतिथि के रूप में अंग उत्थान आन्दोलन समिति के गौतम सुमन,कविवर सच्चिदानंद इंसान, स्वागताध्यक्ष डॉं भूपेन्द्र मंडल एवं समारोह की अध्यक्षता कर रहे उमाकांत भारती एवं संचालक मंच के संयोजक शेषावतार बाबा मनमौजी कर्ण अंगपुरी मंचासीन थे। कार्यक्रम का विधिवत आरंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर हुआ, तत्पश्चात मंचासीन अतिथियों का स्वागत मंच की ओर से माल्यार्पण कर किया गया ।मुख्य अतिथि प्रेमचन्द पांडेय ने कहा कि आज जरूरत है हम साहित्यकारों को अपने लेखनी के माध्यम से देश की हालात पर चिंतन करन की।

स्वागताध्यक्ष डॉ.भूपेन्द्र मंडल ने कहा कि साहित्य की सेवा और साधना समाज की दशा-दुर्दशा में तेजी से सुधार लाता है ।विशिष्ट अतिथि सच्चिदानंद इंसान ने कहा कि साहित्य के बगैर प्रगति या उन्नति की बातें करना बेमानी है। वहीं दूसरे विशिष्ट अतिथि गौतम सुमन ने कहा कि आज कवि गोष्ठी या कवि सम्मेलनों से कविता गायब हो गई है। उन्होंने कहा कि कविता की जगह केवल चुटकुले और लतीफे रह गये हैं जिसे सुनाकर कवि वाहवाही लूटते हैं,यही कारण है कि आज देश-राज्य और समाज की दशा-दुर्दशा दिनों दिन बिगड़ती जा रही है।

काव्य-यात्रा की ओर से आयोजित इस काब्य-धारा

का आरंभ हिमांशु राधेकृष्णा के सरस्वती वंदना से हुआ तत्पश्चात एक से बढ़कर एक काव्य-गजलों से समारोह को काव्योत्सव के रूप में तब्दील कर दिया गया ।कवि डा. भूपेन्द्र मंडल  ने- घूँघट उठता नहीं,चाँद दिखती नहीं…. सुनाया। प्रेमचन्द पांडेय ने जब- संसद अब तो हो रही मछली बाजार, टोका-टोकी, शोर-शराबा नित जूतम पैजार, सुनाया तो माहौल देश भक्ति में डूब गया। डा. कौशलेन्द्र चतुर्वेदी ने मौसम बदल रहा है इंसां बदल रहा है,यही बात हम सबको बता रही है सुनाया। सच्चिदानंद इंसान ने तुम्हारी याद में दिल की रूलाना याद आता है सुनाया। महेश मणि ने गया पुलिस कोर्ट लिखाने रिपोर्ट सुनाकर लोगों को खूब गुदगुदाया। अमरेन्द्र मिश्र ने सुरमयी शाम का ये सुहाना मंजर, आज की शाम हसीन रहने दो सुनाकर माहौल को काव्यमय बना दिया । शेषावतार बाबा मनमौजी कर्ण अंगपुरी ने मत छेड़ो श्री राम को, कोहराम मच जाएगा, राम सेतु तोड़ा, तो विध्वंश हनु मचाएगा…जब सूनाकर लोगों में जोश भरने का काम किया। इस मौके पर ब्रजभूषण शर्मा गगन, ज्वाला अंगार, अनवर भागलपुरी, कृष्ण मोहन किस्लय, आदि ने भी अपनी-अपनी कविताओं से इस वासंती काव्य-धारा को यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। धन्यवाद ज्ञापन दिपेन्द्र कुभार ने कर कार्यक्रम समापन की घोषणा की । इस अवसर पर कई लोगों की उपस्थिति थी जिन्होंने इस आरोजित काब्य-धारा की प्रशंसा करते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर इस तरह बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाली कवि सम्मेलनो में स्थानीय कवियों की उपेक्षा उचित नहीं है ।

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