दिल्ली में रहते हैं लगभग 25 लाख अंगिका भाषी, लोकभाषा के बगैर लोग गूँगे के समान हैं : संजय

अंग क्षेत्र की चर्चा

दिल्ली में भी अंगिका अकादमी गठन करने-कराने की माँग को लेकर आम आदमी पार्टी के राज्य सभा सांसद सह पार्टी के बिहार प्रभारी संजय सिंह को अखिल भारतीय अंगिका साहित्य कला मंच ने सौंपा माँग पत्र

फोटो- सांसद संजय सिंह से वार्ता करते मंच के शिष्टमंडल

भागलपुर। बिहार-झारखंड के लगभग 6-7 करोड़ लोगों की लोकभाषा अंगिका को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने को लेकर पहल करने और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में रह रहे लगभग 25 लाख अंगिका भाषियों की अस्मिता के मान-सम्मान को ध्यान में रखकर दिल्ली में भी अंगिका अकादमी गठन करने-कराने की माँग को ले रविवार को अखिल भारतीय अंगिका साहित्य कला मंच के बिहार प्रदेश महासचिव सुधीर कुमार सिंह प्रोग्रामर के नेतृत्व में स्थानीय परिसदन में एक शिष्टमंडल आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता संवाद में मुख्य रूप से भाग लेने पहुँचे राज्य सभा सांसद सह पार्टी के बिहार प्रभारी संजय सिंह से मिलकर एक माँग-पत्र सौंपा। इस शिष्टमंडल में श्री प्रोग्रामर समेत मंच के महामंत्री हीरा प्रसाद हरेन्द्र, बाबा दिनेश तपन एवं अंग उत्थान आन्दोलन समिति (बिहार-झारखंड) के केन्द्रीय अध्यक्ष गौतम सुमन आदि मुख्य रूप से शामिल थे।

फोटो- सांसद संजय सिंह के साथ अंगिका पदाधिकारियों केशिष्टमंडल

दौरान श्री सुमन ने सबसे पहले उनका इस अंग की ऐतिहासिक कर्ण की धरती सिल्क नगरी में स्वागत करते हुए कहा कि लोकभाषा अंगिका के सम्मान और अधिकार के दिशा में बिहार व झारखंड की सरकार ने काफी सराहनीय कार्य कर सरकारी विभागों व योजनाओं में महत्वपूर्ण जगह दिया है और अंगिका भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने-कराने को लेकर अंग क्षेत्र के पूर्व सांसद भागवत झा आजाद से लेकर पूर्व कुलपति सह सांसद रामजी सिंह, सुबोध राय, सैयद शाहनवाज हुसैन, निशिकांत दूबे, शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल आदि ने सराहनीय प्रयास करते हुए संसद में भी पुरजोर तरीके से अपनी आवाज से अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल होने के सभी मानक व शर्तों पर अंगिका भाषा खड़ी उतरती है, बावजूद इसके अब तक इन्हें इस सम्मान व अधिकार से वंचित रखना लोकतंत्र में एक बड़ी व ऐतिहासिक लोकभाषा के साथ अन्याय है,जो कदापि उचित नहीं है।

प्रोग्रामर ने सांसद संजय सिंह को बताया कि 2017 में छठ महापर्व के मौके पर दिल्ली सरकार ने 300 घाटों पर आयोजित कार्यक्रम में अंगिका भाषा को महत्व देकर लोकभाषा के प्रति जो उन्होंने आस्था-उदारता और विवेकशीलता का परिचय दिया था,वह अपने आप में बड़ी बात थी और अंगिका भाषी इसे कदापि भूलने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में रह रहे लाखों अंगिका भाषियों को दिल्ली सरकार से अपेक्षा है कि वे अन्य लोकभाषाओं की तरह दिल्ली में अंगिका अकादमी का भी गठन कर अंगिका भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने-कराने को लेकर सकारात्मक पहल करें।

वहीं हीरा प्रसाद हरेंद्र और बाबा दिनेश तपन ने भी संजय सिंह का अभिवादन कर अनुरोध किया और कहा कि आप से हम अंगिका भाषियों को काफी उम्मीद और भरोसा है।

इस मौके पर शिष्टमंडल की ओर से सांसद श्री सिंह को अंगिका भाषी जिले एवं पुस्तकों की सूची,बिहार व झारखंड सरकार द्वारा इस भाषा के प्रति किये गये सकारात्मक पहल की सूची,अंगिका साहित्यकारों की संक्षिप्त सूची के साथ एक माँग-पत्र सौंपा गया। विस्तृत बातों को सुनकर सांसद श्री सिंह ने कहा कि लोकभाषा के बगैर लोग गूंगे के समान हैं। लोकभाषा को उनका हर सम्मान और अधिकार मिलना चाहिये क्योंकि यह क्षेत्र की अस्मिता का सवाल है। उन्होंने कहा कि वे इस दिशा में शीघ्र सकारात्मक पहल करके लोकभाषा अंगिका को समुचित सम्मान व अधिकार देने-दिलाने की कोशिश करेंगे।

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