बाल श्रम करवाने वाले लोगों का करें सामाजिक बहिष्कार- उप मुख्यमंत्री बिहार

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राष्ट्रीय बाल श्रम उन्मूलन दिवस पर श्रम संसाधन विभाग, समाज कल्याण विभाग और यूनिसेफ  द्वारा बच्चों के साथ कार्यक्रम का आयोजन

राष्ट्रीय बाल श्रम उन्मूलन दिवस कार्यक्रम का दीप प्रज्वल्लित कर उद्घाटन करते हुए उप मुख्यमंत्री

पटना। अधिवेशन भवन में राष्ट्रीय बाल श्रम उन्मूलन दिवस के अवसर पर श्रम संसाधन विभाग, समाज कल्याण विभाग और यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से एक कार्यकम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने समाज कल्याण विभाग की मंत्री कुमारी मंजू वर्मा, श्रम संसाधन विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा, प्रधान सचिव श्रम संसाधन दीपक कुमार सिंह, श्रम आयुक्त गोपाल मीणा, यूनिसेफ बिहारके कार्यक्रम प्रबंधक शिवेंद्र पांड्या एवं अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में दीप प्रज्वल्लित कर किया। इस दौरान बालश्रम विषय पर बच्चों द्वारा बनाई गई पेंटिंग प्रदर्शनी को देखा और उसकी प्रशंसा की। इस दौरान बच्चों को पुरस्कृत भी किया गया।

राष्ट्रीय बाल श्रम उन्मूलन दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम का उददेश्य बिहार में बाल श्रम की स्थिति के बारे में बच्चों की विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से समाज और नीति निर्धारकों को जागरूक करना और बाल श्रम से विमुक्त करवाए गए बच्चों के मनोबल को बढ़ाना था।

कार्यक्रम की शुरुआत बिहार बाल भवन किलकारी के बच्चों द्वारा एक संगीतमय प्रस्तुति से हुई। बच्चों ने अशोक चक्रधर रचित एक कविता “बूढ़े बच्चे” को संगीतबद्ध कर उसकी मार्मिक प्रस्तुति दी। इसके बाद बच्चों ने किलकारी की निदेशक डॉ ज्योति परिहार के द्वारा लिखे नाटक का मंचन किया। इस अवसर पर रेनबो होम के बच्चों ने भी एक नाटक प्रस्तुत किया।

इन दोनों नाटकों में स्कूलों में रोचक और रचनात्मक शिक्षा की कमी, बच्चों पर अत्याचार और बाल श्रम की समस्या पर केंद्रित इस नाटक ने लोगों के मनोरंजन के साथ ही उनको इन ज्वलंत मुद्दों के बारे में जागरूक भी किया।

उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए नाटक के बाद किसी प्रकार के भाषण की जरूरत नहीं है। बाल श्रम की समस्या गरीबी से जुड़ी है। हमे यह सोचना होगा कि आखिर क्यों कोई मां-बाप अपने बच्चों को काम करने के लिए भेजते हैं। घरों में बच्चों से काम करवाते लोग अक्सर ये तर्क देते है और बच्चों से काम को सही ठहराने का प्रयास करते हुए कहते है कि हम उस बच्चे की मदद कर रहे हैं, पर ऐसा नहीं है। क्यूंकि बच्चों से कम पैसों में दबाव के साथ काम करवाया जा सकता है। जो बड़े लोगों के साथ संभव नहीं है, उन्होंने कहा कि आप के आस-पास जो लोग बच्चों से काम करवाते हैं उनको मुक्त करवाइए, उसके बारे में 9471229133 इस नंबर पर सूचना दीजिए। हमें शादियों में लोगों को कहना चाहिए कि अगर आप बच्चों से काम करवाएं, खाना परोसने का काम करवाएंगे तो हम आपके शादियों का बहिष्कार करेंगें। उन्होंने कहा कि श्रम संसाधन विभाग को एक जागरूकता कैंपेन लाने की जरूरत हैं। लोग अपने लोगों के घरों के बाहर नेमप्लेट की तरह एक स्टीकर लगायें कि मेरे यहां बाल श्रमिक नहीं है। 2016 में मुख्यमंत्री ने चाइल्ड लेबर ट्रैकिंग सिस्टम (सीएलटीएस) की शुरूआत की थी

(सीएलटीएस) में जिन विमुक्त करवाए गए बच्चों को रजिस्टर किया गया है उन्हें मुख्यमंत्री राहत कोष से 25000 रूप्ये की राशि दी जाती हैं अब तक 1254 बच्चों को यह राशि दी जा चुकी है। जब तक गरीबी होगी तक तक बाल श्रम को समाप्त करना कठिन होगा। बच्चों के लिए खेलना, पढना और सुरक्षित रहना उनका अधिकार है। उन्होंने कहा कि अगर किसी बरतन धोते बच्चे, किसी दूकान पर काम करते हुए बच्चे को देखकर आपको कसक नहीं होती हैं, दर्द नहीं होता तो इसका मतलब है आप संवेदनशील नहीं है। कार्यक्रम के दौरान बाल श्रम से मुक्त करवाए गए 4 बच्चों को सम्मानित किया गया जो आगे अपनी पढाई कर रहे हैं।

श्रम संसाधन मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 14 से कम उम्र के बच्चों को किसी भी काम में नियोजित करने पर प्रतिबंध है। वहीं 18 साल से कम उम्र के बच्चों को खतरनाक कार्यो में लगाना गैरकानूनी है। बाल श्रम के बारे में शिकायत के लिए बने नंबर 9471229133 के बारे में बताते हुए माननीय मन्त्री ने कहा कि आप सभी अपने आस पास अगर बाल श्रम का कोई मामला देखें तो इस नंबर पर उसके बारे में सूचना दें।  अगर हम-सब लोग एक-एक बच्चे को पढ़ाने की जिम्मेदारी ले लें तो यह एक समाजिक सदभाव का वातावरण बनाने के साथ ही बच्चों को उनका बचपन वापस करने में भी सहायक साबित होगा। बिहार को बाल श्रम मुक्त बनाने के लिए उन्होनें सामाजिक संगठनों से आग्रह किया कि हर गैर सरकारी संगठन एक शहर को गोद लें और उसे बाल श्रम मुक्त बनाने की दिशा में कार्य करें। विभाग उनको हर प्रकार का सहयोग देगा इसके साथ ही एक कार्यक्रम में उनको सम्मानित भी किया जायेगा।

समाज कल्याण मंत्री श्रीमती कुमारी मंजू वर्मा ने कहा कि बच्चों के प्रति विभाग तो जबावदेह है लेकिन जो अभिभावक हैं उन्हें भी जागरूक होना होगा। आज हमारे विभाग के तरफ से 1 लाख से ज्यादा वार्डों पंचायतों में इस प्रकार के कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। एक मां के नाते मैं मीडिया के साथियों से आग्रह करूंगी कि वो समाज को संवेदनशील करने में अपना सहयोग दें। सभी बच्चे बराबर हैं और उनके अपने सपने होते हैं। ज्यादातर मां बाप अनपढ होते है उनको दलाल गुमराह करते हैं। यह हमारे समाज की विडंबना है कि कुछ बच्चे तो सोने के चम्मच के साथ जन्म लेते हैं और कुछ बच्चों को उनका बचपन नहीं नसीब हो पाता। जब तक हम यह नहीं समझ पाएं कि जो भी बच्चा बाल श्रम में लगा है वो अपने समाज का है बाल श्रम को दूर करना कठिन होगा, इसमें  विभाग के साथ ही समाज की भूमिका बहुत ही महत्वूपर्ण है।

यूनिसेफ के कार्यक्रम प्रबंधक शिवेंद्र पांड्या ने कहा कि यूनिसेफ, श्रम संधान विभाग, शिक्षा विभाग और समाज कल्याण के साथ मिलकर बाल संरक्षण के सारे आयामो पर लंबे समय से काम कर रहा है। चाइल्ड लेबर ट्रैकिंग सिस्टम (सीएलटीएस)  के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि बाल श्रम से मुक्त करवाए गए बच्चों को ट्रैक करने और उनके पुनर्वास कि प्रगति को ट्रैक करने के लिए 2016 में एक वेब पोर्टल श्रम संसाधन विभाग और यूनिसेफ के द्वारा विकसित किया गया हैं सभी बच्चों के लिए स्वास्थ्य, सुरक्षा, पोषण, भागीदारी का अधिकार सुनिशिचित करने के लिए यूनिसेफ, सरकार और सभी हितधारकों के साथ मिलकर कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मानव तस्करी के क्षेत्र में काम करने वाली पद्मश्री कविता कृष्णन ने कहा कि पिछले 25 सालों में हमने पूरे भारत से 20,000 लड़कियों को विमुक्त करवाया है। हमें बाल श्रम का विरोध इसलिए करना चाहिए क्योंकि वो गलत है। हर बच्चे का हक़ है अपना बचपन जीने के लिए। आज के दिन को एक सामाजिक अवलोकन कि तरह देखने का है, एक प्रतिज्ञा लेने का दिन है कि अगले साल तक हम बिहार को बाल श्रम मुक्त कर ले। बच्चों के पुनर्वास के बजाय हमें उनके मां-बाप के पुनर्वास पर ध्यान देने की जरूरत है। हमलोगों को ये समझना जरूरी है अगर एक पीढ़ी का विकास नही होगा तो हमारे पूरे  समाज का विकास नहीं होगा। ये एक ऐसा  विषय है जिसमें हमे सहिष्णु नही होना चाहिए।

प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह ने अपने स्वागत संबोधन में सभी का स्वागत करते हुए कहा कि बिहार को बाल श्रम मुक्त बनाने के लिए सभी विभागों जैसे शिक्षा, समाज कल्याण, श्रम संसाधनए पंचायती राज का आपस में समन्वय के साथ काम करने कि आवश्यता है।

कार्यक्रम का धन्यवाद् ज्ञापन करते हुए श्रम आयुक्त गोपाल मीणा ने कहा कि श्रम पदाधिकारियों के द्वारा बाल श्रम के क्षेत्र में किया गया कार्य उनके विभागीय कार्य क्रमांक को दिखाता है। चाइल्ड लेबर ट्रैकिंग सिस्टम (सीएलटीएस) का उल्लेख करते हुए इसे अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और भविष्य में इसे और परिष्कृत करने पर बल दिया।

कार्यक्रम में 4 जिलों में आयोजित चित्रकला और निबंध प्रतियोगिता के विजेता बच्चों को पुरस्कृत किया गया ज्ञात हो कि पटना, गया, दरभंगा और भागलपुर में चित्रकला और निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था, जिसमें विमुक्त बच्चों ने भी भाग लिया था इन चार जिलों में से दो कोटि में कुल 24 बच्चों को पुरस्कृत किया गया था।

कार्यक्रम में विभिन्न सरकारी विभागों के प्रतिनिधि, यूनिसेफ के प्रतिनिधियों, गैर सामाजिक संगठनो के प्रतिनिधि, किलकारी और रेनबो  होम और अलग अलग जिलों के बाल केन्द्रों के लगभग १५० बच्चों ने भाग लिया।

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