राजभवन में कुलसचिवों की एक-दिवसीय कार्यशाला हुई आयोजित

शिक्षा

पटना। उच्च शिक्षा में अपने सुधार-प्रयासों को सफल बनाते हुए हमें शिक्षा क्षेत्र में बिहार के पुराने गौरव को पुनर्स्थापित करना है। उच्च शिक्षा के विकास हेतु पारदर्शिता, ईमानदारी और पूरी कर्त्तव्यनिष्ठा के साथ अगर हम प्रयास जारी रखते हैं तो कोई कारण नहीं कि हम अपने इरादे को मूर्त्त रूप दे पाने में सफल नहीं हो पाएँ। उक्त विचार राज्यपाल-सह-कुलाधिपति सत्य पाल मलिक ने राजभवन सभागार में आयोजित कुलसचिवों की एक-दिवसीय कार्यशाला को उद्घाटित करते हुए व्यक्त किये।

राज्यपाल ने कहा कि राज्य में विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता (Atonomy)  का पूरा सम्मान करते हुए उन्हें अपने विकास कार्यक्रमों और नवाचारी योजनाओं को कार्यान्वित करने की पूरी आजादी होगी। उन्होंने कहा कि कुलपति, कुलससचिव और परीक्षा-नियंत्रक विश्वविद्यालय प्रशासन के महत्त्वपूर्ण अंग होते हैं। इन तीनों को समन्वयपूर्वक विश्वविद्यालय की विकास-योजनाओं को निश्चित समय-सीमा में पूर्ण करने हेतु पूरी तरह संकल्पित   होना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि नवनियुक्त सभी कुलपति और कुलसचिव प्रतिभावान और परिश्रमी हैं, इनसे बेहतर परिणाम की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि सैन्य सेवाओं से आनेवाले अधिकतर कुलसचिव अपनी ईमानदारी और कार्य के प्रति समर्पण के लिहाजन विश्वविद्यालयों की शिक्षा-व्यवस्था में व्यापक सुधारों को गति प्रदान करेंगे, ऐसी पूरी उम्मीद है। राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय की गरिमा और प्रतिष्ठा बढ़ाने तथा शिक्षण-व्यवस्था को आदर्श मानकों के अनुरूप विकसित करने हेतु विश्वविद्यालय के सभी अधिकारियों को पूरी तत्परता और निष्ठा से कार्य करना होगा।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए राज्यपाल के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह ने कहा कि त्रुटियों से बराबर सीख मिलती है, किन्तु उनकी पुनरावृत्ति न हो -ये हर हालत में सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में वित्तीय मामलों में नियमितता बनी रहे, न्यायालयीय मामलों का ससमय निष्पादन हो, कुलाधिपति की बैठकों में लिए गए निर्णयों का पूर्णतः अनुपालन हो तथा सारे मामले विश्वविद्यालयीय अधिनियमों एवं परिनियमों के आलोक में निष्पादित हों यह सुनिश्चित कराया जाना चाहिए।

कार्यशाला में पटना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो॰ रास बिहारी प्रसाद सिंह ने एकेडमिक एवं परीक्षा कैलेण्डर, शिक्षकों एवं छात्रों की बायोमैट्रिक उपस्थिति, कुलसचिव के निर्धारित कार्य विषय पर, मुंगेर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो॰ रंजीत कुमार वर्मा ने नये महाविद्यालयों के निबंधन तथा आर॰टी॰जी॰एस॰ के जरिये शिक्षकों एवं कर्मियों के वेतन-भुगतान, बी॰एड॰ कॉलेजों के निरीक्षण, दावा-निष्पादन-पद्वति, मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो॰ कमर अहसन ने व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के नियमबद्ध संचालन, पटना विश्वविद्यालय की प्रतिकुलपति प्रो॰ डॉली सिन्हा ने विश्वविद्यालय व महाविद्यालय परिसरों में वाशरूम व टॉयलेट एवं अन्य आधारभूत संरचनाओं के विकास हेतु राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजने जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों पर पावर प्रेजेन्टेशन के जरिये अपने विचार व्यक्त किये। विशेष कार्य पदाधिकारी (न्यायिक) ने न्यायालीय मामलों के अनुश्रवण पर अपने विचार रखे, जबकि विश्वविद्यालय व महाविद्यालय परिसरों में ‘वाई-फाई की संस्थापना एवं संधारण, Government –e- marketplace (GeM)  के जरिये खरीददारी, सेवांत लाभ के भुगतान एवं इनसे जुड़े मामलों के निस्तारण, लेखा-संधारण आदि विषयों पर भी तकनीकी पदाधिकारियों एवं वित्तीय सलाहकार द्वारा विचार व्यक्त किये गए। कार्यशाला में स्वागत-भाषण राज्यपाल सचिवालय के अपर सचिव विजय कुमार ने किया। इसमें राज्यपाल सचिवालय के सभी वरीय अधिकारियों एवं राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों ने भाग लिया।

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