बिहार में कला एवं शिल्प की समृद्ध विरासत रही है: राज्यपाल

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पटना। बिहार में कला एवं शिल्प की विरासत काफी गौरवपूर्ण एवं समृद्ध रही है। पाटलिपुत्र प्राचीन महानगरों के रूप में पूरी दुनियाँ में विख्यात रहा है। ‘‘पटना कलम’’ शैली की भी ख्याति पूरी दुनियाँ में रही है। उक्त उद्गार राज्यपाल-सह-कुलाधिपति सत्यपाल मलिक ने स्थानीय कला एवं शिल्प महाविद्यालय परिसर में आयोजित इस महाविद्यालय के प्रथम पूर्ववर्त्ती विद्यार्थी सम्मेलन (सी॰ए॰सी॰ एलूमिनि मीट-2018) का उद्घाटन करते हुए  व्यक्त किये।

राज्यपाल श्री मलिक ने कहा कि पटना ‘सुलेख कला’ का भी प्रमुख केन्द्र रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार की कला का इतिहास यह बताता है कि सन् 1790 में चित्रकारों का एक दल मुर्शीदाबाद से आकर तत्कालीन बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में बसा। ये चित्रकार यूरोपीय और भारतीय दोनों कला की बारीकियों को समझते थे। मुगल शैली और कंपनी शैली के समन्वय से बनी बिहार की प्रान्तीय कला शैली की शुरूआत बिहार में हुई। कालान्तर में यहाँ ‘पटना कलम’ शैली विकसित हुई, जिसने पूरी दुनियाँ में ख्याति अर्जित की। उन्होंने कहा कि मुखाकृति चित्रण और मुक्त चित्रण दोनों शैलियाँ यहाँ विकसित हुईं। बिहार में यह पहला अवसर था, जब कला दरबारी संस्कृति से मुक्त होकर धीरे-धीरे आम जन-जीवन की ओर भी मुड़ने लगी।

राज्यपाल ने कहा कि बिहार की मधुबनी पेंटिंग और मिथिलांचल की भित्ति चित्रण की कला भी काफी आकर्षक एवं विश्वविख्यात है। सन् 1939 में स्थापित बिहार एवं झारखंड के एकमात्र इस कला एवं शिल्प महाविद्यालय के पूर्ववर्त्ती छात्रों ने बिहार एवं भारत को पूरे विश्व में कला की दुनियाँ में काफी प्रतिष्ठा दिलायी है। पूर्ववर्त्ती छात्रों को इस महाविद्यालय के विकास हेतु बराबर अपने सुझाव देते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपने कॉलेज के दिनों को आदमी कभी नहीं भूलता और इन्हें आजीवन याद रखता है। कॉलेज के दिन दरअसल अविस्मरणीय होते हैं, जिनके आगे आदमी सारी खुशियाँ वार देता है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पटना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो॰ रासबिहारी प्रसाद सिंह ने कहा कि 70 के दशक में पटना विश्वविद्यालय में शामिल इस महाविद्यालय की कला की दुनियाँ में काफी प्रतिष्ठा है। राज्य के पूर्व मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि आधुनिक बिहार की ऐतिहासिक विरासतों को प्रदर्शित करने के लिए बिहार संग्रहालय एवं पटना संग्रहालय में विशेष दीर्घाएँ तैयार हो रही हैं। उन्होंने कहा कि कला एवं संस्कृति के विकास हेतु राज्य में बेहतर माहौल बना है और कलाकारों को इससे लाभान्वित होना चाहिए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुप्रसिद्ध समीक्षक प्रयाग शुक्ल ने कहा कि यह युग छवियों का युग है और इन सभी प्रकार की छवियों को बारीकी से चिन्हित करने की जिम्मेवारी कलाकारों पर आ पड़ी है। कार्यक्रम में स्वागत-भाषण महाविद्यालय के प्राचार्य अजय पाण्डेय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन पटना विश्वविद्यालय की प्रतिकुलपति श्रीमती प्रो॰ डॉली सिन्हा ने किया। कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध कलाकार  श्याम शर्मा एवं बिहार संग्रहालय के निदेशक भी उपस्थित थे।

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