हिन्दी संवेदना और संपर्क का सशक्त माध्यम :- शम्भु

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हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में परिचर्चा सह सम्मान समारोह आयोजित

भागलपुर/संवाददाता।

हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में राढ़ी बांधव समिति के बैनर तले सुरखी कल स्थित समिति के कार्यालय परिसर में परिचर्चा सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग के सेवा निवृत्त प्राध्यापक डॉ. राजेन्द्र पंजियार, जिला सांख्यिकी विभाग के अधिकारी सह वरिष्ठ कवि  शम्भु राय, एवं लब्ध प्रतिष्ठ कवयित्री माधवी चौधरी को  साहित्य, समाज सेवा एवं संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. श्याम लाल आनंद स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया। समारोह की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष सोमेन कुमार ने की और इसका संचालन समिति के महा सचिव शैलेश कुमार दास ने किया।कार्यक्रम का आगाज गीतकार राजकुमार द्वारा प्रस्तुत समिति के कुलगीत की प्रस्तुति से हुआ। इस मौके पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राजेन्द्र पंजियार ने कहा कि हिन्दी हमारे  आत्म गौरव और आत्मसम्मान की भाषा है।यह हमें हमारी पावन पुरातन संस्कृति की पहचान कराती है। भले ही अंग्रेजी आज अंतराष्ट्रीय भाषा के रूप में विश्व के मानचित्र पर छा गयी है, इसके बावजूद अंतराष्ट्रीय स्तर पर  हिन्दी का फलक छोटा नहीं हुआ है। कई देशों में प्रमुखता से बोली जाती है।उन्होंने हिन्दी को भावों और संवेदनाओं को व्यक्त करने का सरल,सहज और बोधगम्य भाषा बताते हुए लोगों से हिन्दी भाषा सीखने की अपील की।

शम्भु राय ने कहा कि हिन्दी संपर्क की भाषा है। यह जन आंदोलन का सशक्त माध्यम है। इसने भारत के लोगों को एक दूसरे को आजतक जोड़े रखा है। वहीं माधवी चौधरी ने कहा कि हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है।यह हमें राष्ट्रीयता का बोध कराते हुए हमारे अंदर देशभक्ति भावों का संचार करती है।

इस मौके पर आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए सोमनाथ ने कहा कि यह कैसी विडंबना है कि आज जहां दुनिया के लोग हिन्दी और संस्कृत सीख रहे हैं वहीं मातृभाषा होते हुए भी हम हिन्दी से विमुख हो रहे हैं।ऐसे में स्कूल कॉलेज के पाठ्यक्रम में हिन्दी कोअनिवार्य भाषा बनाने की जरूरत है।इससे हिन्दी के प्रति  लोगों की  रूचि बढ़ेगी।  इस मौके पर कवि गोष्ठी भी आयोजित की गयी।गोष्ठी में  दिनेश तपन,राजकुमार, प्रसून ठाकुर,गौतम सुमन वीरेंद्र कुमार सिन्हा, प्रणव कुमार दास,रंजीत कुमार चौधरी, कुमारी प्रिया एवं उदय शंकर घोष समेत कई लोगों ने अपने उदगार व्यक्त किये।

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