बिलखती गंगा की फरियाद ,लेकिन सुने कौन ?

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भागलपुर में गंगा की स्थिति नारकीय

कूड़े-कचड़े और प्लासिटक से पटी है गंगा

Pankaj Thakur

गंगा की स्थिति दिनों दिन बदहाल होती जा रही है। हमलोगों से गंगा अब दूर होते जा रही है। अगर ऐसी स्थिति बनी रही तो वह दिन दूर नही जब लोग गंगा के जल से आचमन करने को तरस जायेगें। ज्यों-ज्यों गंगा अपने घाट दूर जा रही जल स्तर भी उतनी तेजी से घटता जा रहा है। जलचव पर भी काफी बूरा असर पड़ रहा है। घाट गंदगी से घाट पटा हुआ है। केन्द्र सरकार हो या राज्य सरकार अथवा अन्य स्वयंसेवी संगठन गंगा को प्रदूषण मुक्त करने का संकल्प तो लेते है। इसके बावजूद इसकी स्थिति में सुधार होता नही दिख रहा है। सरकार को गंगा को प्रदूषित होने से बचाने के लिए कोई ठोस पहल किये जाने की जरूरत है। जानकार बताते है कि अगर गंगा को प्रदुषण से मुक्त नही किया गया तो आने वाले समय में सिर्फ गंगा नाम मात्र रह जायेगा। गंगा को प्रदुषण से बचाने के लिए सभी को एकजूट होकर आगें आना होगा। गंगा स्नान करने वाले भी अपने साथ पोलिथिन में कपड़े आदि लाते हैं और उसे गंगा किनारे या फिर गंगा में प्रवाहित कर देते हैं। गंगा में स्नान के दौरान उपयोग होने वाले साबुन, तेल पर पूर्ण रूपेण रोक लगानी चाहिए। आज भी लोग गंगा घाट पर साबुन तेल लगाकर स्नान करते हैं और गंगा को प्रदूषित करते हैं। बरारी में सीढ़ी घाट बनाया गया है। पश्चिम तरफ से नाला बह रही है। इतना ही नहीं बरारी, सुल्तानगंज सहित अन्य जगहों पर गंगा के किनारे शव जलाया जाता है और अधजले लकड़ी सहित अन्य कपड़ा पोलिथिन आदि गंगा में प्रवाहित कर दिया जाता है। जिससे गंगा और प्रदूषित हो रही है। गंगा में शहर का कूड़ा-कचरा भी सीधे गंगा में जा रहा है। जिससे भी गंगा प्रदूषित हो रहा है। पूजा समारोह में में बिठायी जाने वाली प्रतिमाओं का विर्सजन भी गंगा में किया जाता है। इसके लिए अलग व्यवस्था करनी चाहिए। माल-मवेशी जैसे भैंस गंगा में स्नान कराते देखा जा सकता है। इस पर भी रोक लगाये जाने की जरूरत है।

गंगा को धर्म के वजाय जीवन शैली से जोड़े :डां फारूक अली

भागलपुर विवि के वरीय प्राध्यापक डॉ फारूक अली कहते है कि गंगा के किनारे बढ़ती आवादी का दबाव है। हरिद्वार से मुर्शिदाबाद होते हुए मालदा तक गंगा की साफ करने की जरूरत है। गंगा की सफाई के लिए सतत प्रयास करने से ही यह संभव हो पाएगा। गंगा की सफाई करने में कम से कम दो दशक लगेंगे। सरकार गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित किया है। इसके बावजूद भी इस पर जो पहल होनी चाहिए थी अब तक नहीं किया जा सका है। वैधानिक संस्था बनाकर इसे सफाई किया जा सकता है। गंगा की सफाई तभी होगी जब हम जात-धर्म और राजनीतिक से उपर उठकर सोचेंगे तभी यह संभव है। सिर्फ गंगा की समय-समय पर आरती किए जाने से गंगा की सफाई नहीं हो सकती। गंगा को धर्म के वजाय इसे जीवन शैली से जोड़ने की आवश्यकता है। गंगा सफाई के लिए जन भावना से जोड़ना होगा। गंगा की सफाई के लिए आम लोगों में भी जागरूकता लानी होगी तभी गंगा स्वच्छ व निर्मल हो सकती है।