भगत और डॉ लोहिया समाजवाद के प्रबल समर्थक:उदय

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परिधि ने भगत सिंह की मूर्ति पर माल्यार्पण कर दी श्रद्धांजलि

भागलपुर/संवाददाता। भगत सिंह के शहादत दिवस पर पीस सेंटर परिधि की ओर से भगतसिंह की मूर्ति पर माल्यार्पण कर भगतसिंह चैक पर भावभीनी श्रद्धांजलि दिये जाने पश्चात पीस सेंटर परिधि, राष्ट्र सेवादल, लोकचेतना एवं गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र द्वारा वर्तमान भारत में प्रसांगिकता विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया । कार्यक्रम का संचालन करते हुए उदय ने कहा कि भगत सिंह और डॉ लोहिया दोनों ही समाजवाद के प्रबल समर्थक थे और दोनों ही क्रांतिकारी विचारक थे। वे देश में भेदभावरहित, विषमतारहित, समाजव्यवस्था और राजनीतिक व्यवस्था चाहते थे । वे धर्म, ढकोसला के बिल्कुल खिलाफ थे । वहीं भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलानुशासक डा विलक्षण रविदास ने कहा कि भगतसिंह ने एक समतामूलक, समाजवादी देश की कल्पना की थी। वे सिर्फ अंग्रेजों से ही छुटकारा नही चाहते थे बल्कि शोषण और अन्याय से भी आजादी चाहते थे । उन्होंने कहा कि भारत का नवनिर्माण तभी होगा जब जातिभेद, छुआ-छूत, वर्ग भेद, लिंग भेद का अंत हो जायेगा। तभी भगत सिंह व लोहिया के सपनो का भारत बनेगा। इस मौके पर प्रकाश चंद्र गुप्ता ने कहा कि दोनों विभूति समाजवाद के प्रखर चिंतक थे। लोहिया ने भारत में जाति को एक ठहरा हुआ वर्ग माना था , इसलिये उन्होंने वर्ण से वर्ग (कास्ट टू क्लास ) का सूत्र दिया। लोहिया ने जाति और जेंडर के अन्तर्सम्बन्ध को भी रेखांकित किया ।
डीएसओ के रौशन ने कहा कि आज जब कारपोरेट और धार्मिक कट्टरता का  गठजोड़ हो चुका है ,तार्किकता , इतिहास, वैज्ञानिकता ,समतावाद ,और बहुलतावाद पर आधारित राष्ट्रीयता खतरे में है  ऐसे में भगतसिंह और लोहिया के विचार और भी प्रासंगिक हो गए हैं । धन्यवाद ज्ञापन राहुल ने किया। इस मौके पर हबीब मुर्शीद खां,रामशरण,ऐनूल होदा,पूनम श्रीवास्तव,डाॅ.कपिलदेव मंडल,डाॅ. जयंत जलद,सुषमा प्रिया,जावेद खां,रिजवान,दीप प्रिया,रवि,सार्थक भारत और ललन समेत कई लोगों ने अपने विचार व्यक्त किये।