बिहार के सभी लोग एक दुसरे की भाषा को सम्मान दें – प्रो. डॉ. देवेन्द्र

बिहार के सभी लोग एक दुसरे की भाषा को सम्मान दें – प्रो. डॉ. देवेन्द्र

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अंगिका भाषा पर हुआ बेबीनार

बेबीनार में भाग ले रहे विराट हिन्दुस्तान संगम के पदाधिकारी और श्रोता समूह

श्रीमती रिंकु रंजन

पटना। डा. सुब्रह्मण्यम स्वामी के नेतृत्व वाली विराट हिन्दुस्तान संगम बिहार शाखा द्वारा 38वीं बेबीनार आयोजित की गयी। इसमें बिहार की भाषाओं एवं बोलियों पर संवाद श्रृंखला की शुरुआत की गयी। जिसके पहली कड़ी में – अंगिका की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों एवं समाधान विषय पर वक्ताओं ने अपने-अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के प्रारंभ में बिहार शाखा के अध्यक्ष प्रो. डॉ. देवेन्द्र प्रसाद सिंह ने संस्था के उद्देश्य पर प्रकाश डाला और आज के विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि बिहार की भाषाएँ समृद्ध है। यहाँ की भाषाओं को अष्टम अनुसूची में दर्ज होना चाहिए लेकिन राजनीतिक कारणों से यहाँ की भाषा को समुचित संरक्षण नहीं दिये जाने और अष्टम अनुसूची से बाहर रखने के कारण बिहार को पीछे धकेलने का काम किया गया है। हमारी मातृभाषा को अष्टम अनुसूची में जगह मिल जाय तो यहां के प्रतिभावान बच्चे आगे की विभिन्न परीक्षा में उच्चतम स्तर पर परीक्षा पास करेंगे जिससे उसकी मातृभाषा रोजगार परक हो जायेगी एव बिहार विकास के रास्ते पर चल पड़ेगा। उन्होंने कहा की यहाँ की सभी भाषा लोकप्रिय और कर्णप्रिय हैं। सभी भाषा-भाषी से उन्होंने अपील की कि कोई लोग दूसरे भाषा को नीचा दिखाने का प्रयास न करें। जिस प्रकार आपकी मातृभाषा आपके लिए प्रिय है ठीक उसी प्रकार उनके लिए भी उनकी भाषा प्रिय है, इसके लिए विवाद की आवश्यकता नहीं है बल्कि एक दुसरे को सम्मान देने की आवश्यकता है। विराट हिन्दुस्तान संगम बिहार ईकाई केन्द्र सरकार से संघर्ष कर यहाँ की सभी भाषाओं को आठवीं अनुसूची में दर्ज कराने का काम करेगी।

डॉ. राज राजीव ने विषय प्रवेश कराते हुए अंग जनपद के इतिहास पर विषद चर्चा की और मातृभाषा अंगिका को अतिप्राचीन भाषा बताया।

मुख्य वक्ता डॉ. विभुरंजन ने कहा कि अंगिका भाषा अंग जनपद की लोक प्रिय भाषा है और इसकी अपनी संस्कृति, कला, साहित्य, व्याकरण, शब्दकोश सभी समृद्ध हैं। सरकारी उदाशीनता के कारण यह भाषा हासिये पर खड़ी है। फिर भी अंग क्षेत्र के लोग अपने बलबूते यहां की लोककला, संस्कृति और साहित्य आदि को संजोए हुए हैं और इसके समृद्धि के लिए प्रयासरत हैं। डॉ. रंजन ने कहा कि सरकारी सहायता यदि मिलती है तो अंगिका को अपनाकर लोग आगे रोजगारपरक सुविधा प्राप्त कर खुशहाल जीवन जी सकेंगे।
बेबीनार की अध्यक्षता कर रहे प्रो. डॉ. मधुसूदन झा पूर्व विभागाध्यक्ष स्नातकोत्तर अंगिका विभाग तिलकामाँझी भागलपुर विश्वविद्यालय भागलपुर ने कहा कि अंगिका अब अंग क्षेत्र की ही भाषा नहीं रही यह भाषा अब कई देशों में बोली और लिखी जा रही है। अंग क्षेत्र के लोग जहां-जहां गये हैं वे वहां अपनी मातृभाषा को संजोए हुए हैं। उन्होंने कहा की तीन कोस में पानी बदले नौ कोस में वाणी वाली कहावत आज फलीभूत नहीं हो पा रही है। आज अपार्टमेंट वाली युग में एक अपार्टमेंट में विभिन्न भाषा के लोग रहते हैं। साथ ही उन्होंने अंगिका को समृद्ध भाषा बताते हुए प्रमाणिक पुस्तकों व ऐतिहासिक दस्तावेज की चर्चा की।

बेबीनार का संचालन डा. विरेन्द्र कुमार ने किया। वहीं इस अवसर पर प्रो. डॉ.एस.एन.पाण्डेय, पर्यावरणविद किशोर जायसवाल, आशीष कुमार राय, लाल रंजन पप्पु, डॉ. शारदा नन्द चौधरी, डॉ. अमरेंद्र, शंभुनाथ मिस्त्री, डॉ. मंजीत सिंह किनवार, कुमार गौरव, अंजनी कुमार शर्मा, भवानन्द सिंह प्रशांत, सुधीर कुमार प्रोग्रामर, डॉ. श्यामसुंदर आर्य, त्रिलोकी नाथ दिवाकर, डॉ. इन्दुभूषण मिश्र देवेन्दु, दिल्ली से डॉ. शशिधर मेहता, डॉ. टूनटून झा ‘अचल’ के साथ-साथ देश के सैकड़ों साहित्यकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करायी। उक्त जानकारी विराट हिन्दुस्तान संगम के बिहार मीडिया प्रभारी डॉ.विभुरंजन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

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