हरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय की मनाई गई जयंती

चितरंजन। हरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय का 2अप्रैल को जन्म दिन है। ये पश्चिम बंगाल की राज्यपाल सरोजिनी नायडू के भाई लगते थे। वे एक सम्पूर्ण नाट्यकर्मी, फिल्ममेकर, अभिनेता, गीतकार, संगीतकार समेत ना जाने क्या-क्या थे। भारत सरकार ने इन्हें सर्वोच्च सम्मान पद्मविभूषण से सम्मानित किया था। 23जून 1990को 92 साल की उम्र में इनके जीवन का पटाक्षेप
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(चित्तरंजन से पारो शैवलिनी की रिपोर्ट)। रेलनगरी के हिन्दी नाटककार मिहीजाम निवासी देवेन्द्र शर्मा ने कहा, रामजीवन गुप्त जितने अच्छे नाटककार थे उससे कहीं बेहतर इंसान थे। श्री शर्मा ने कहा उनके साथ मुझे 6-7 हिन्दी नाटक में काम करने का मौका मिला था। अपने काम में वो किसी भी तरह का समझौता नहीं करते
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पं. बंगाल ब्यूरो प्रमुख (पारो शैवलिनी) चित्तरंजन। रेलनगरी के एरिया-चार स्थित श्री लता इन्स्टीट्यूट में चल रहे पुस्तक मेला के दूसरे दिन आयोजित काव्य संध्या में अपनी स्वरचित कविता का पाठ के दौरान चिरेका कर्मी संजीव सिंह ने कहा कि हमारे एकाकी जीवन का एकमात्र सच्चा दोस्त अगर कोई है तो वो है पुस्तक। एक
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पारो शैवलिनी, चित्तरंजन,पश्चिम बर्धमान (पश्चिम बंगाल) 713331 तुम मुझे संरक्षण दो, मैं तुम्हें हरियाली दूंगा काटो और काटो और-और काटो क्योंकि कटना ही तो नियति है हमारी अगर कटेंगे नहीं तो बंटे कैसे कभी छत, कभी चौखट, कभी खिड़की कभी खंभों के रूप में तो कभी अस्तित्व प्रहरी दरबाजे के रूप में तुम झूठला नहीं
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साहित्य कोनानारी मूरत प्यार की, ममता का भंडार।सेवा को सुख मानती, बांटे ख़ूब दुलार॥●●●अपना सब कुछ त्याग के, हरती नारी पीर।फिर क्यों आँखों में भरा, आज उसी के नीर॥●●●रोज कहीं पर लुट रही, अस्मत है बेहाल।खूब मना नारी दिवस, गुजर गया फिर साल॥●●●थानों में जब रेप हो, लूट रहे दरबार।तब ‘सौरभ’ नारी दिवस, लगता है
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चितरंजन से पारो शैवलिनी। मेरी बांग्लादेश यात्रा। अरे नहीं मैं तो यहाँ कभी गया ही नहीं। दरअसल, ये उस किताब का नाम है जिसे मेरे परम मित्र रावेल पुष्प जी ने लिखा है। पन्द्रह फरवरी 2025 को पुष्प जी चित्तरंजन आये थे। रूपनारायणपुर के नान्दनिक हाल में आयोजित एक सम्मान समारोह में शामिल होने। आने
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चित्तरंजन में मातृभाषा दिवस पर विशेष आयोजन पश्चिम बंगाल ब्यूरो प्रमुख पारो शैवलिनीचित्तरंजन। रेलनगरी के एरिया चार स्थित राजा राम मोहन मंच पर अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया गया। झरना राय के उदबोधनी संगीत से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में गीत, कविता व आवृत्ति के माध्यम से रचनाकारों ने मातृभाषा की दिशा
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मधेपुरा (बिहार), संवाददाता। विश्व मातृभाषा दिवस के अवसर पर भगवान पुस्तकालय भागलपुर में आयोजित राष्ट्रीय अंग समागम में अंग जन गण की ओर से सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें साहित्यकार, समाजसेवी सह पर्यावरण प्रेमी संजय कुमार ‘सुमन’ को “कर्ण पुरुस्कार 2025” से सम्मानित किया गया। श्री सुमन के इस सम्मान से सामाजिक कार्यकर्ताओं
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बरियारपुर (मुंगेर) से नरेश आनंद की रिपोर्ट। गज़लकार दिलीप कुमार सिंह दीपक के निधन से लक्ष्मीपुर (लोहची) गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। श्री सिंह बिहार राज्य के राजा कर्ण की नगरी मुंगेर जिला के लक्ष्मीपुर (लोहची) गांव के निवासी हैं।आज अहले सुबह 62 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपनी लीला समाप्त की।दो वर्ष पूर्व
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डाॅ. विभुरंजन की कलम से मनोविज्ञान के अग्रेजी में टर्म है : “Narcissist” जिसका हिन्दी मतलब होता है “आत्ममुग्ध”।सीधे शब्दों में समझें तो वैसे व्यक्ति को आत्ममुग्धता का शिकार कह सकते हैं जिसमें आत्म-महत्व की अतिशय भावना, दूसरों के प्रति सहानुभूति का अभाव, अत्यधिक प्रशंसा की चाहत व मन में यह विश्वास कि वे अद्वितीय
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